दिल्ली की प्यास बुझाने वाली 102 किमी लंबी मुनक नहर की कहानी

By Abhishek Raghuvanshi
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नई दिल्ली: देश की राजधानी को पानी की ज्यादातर सप्लाई हरियाणा से होती है लेकिन आज और कल दिल्लीवालों को पानी की किल्लत हो सकती है। दरअसल, मुनक नहर का एक हिस्सा सोनीपत के पास टूट गया है। बडवासनी गांव में करीब 50 मीटर नहर टूट गई है और यह कल तक ठीक हो पाएगा। ऐसे में हरियाणा के रास्ते दिल्ली आने वाले पानी की आपूर्ति पर असर पड़ा है। जी हां, इसी रास्ते से दिल्ली को 750 क्यूसेक पानी मिलता है। अब यह 20 फीसदी तक घट गया है। भीषण गर्मी में इस जल संकट ने दिल्लीवालों को परेशान कर दिया है। पानी कम आएगा तो कई ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित होंगे। वैसे दिल्ली जलबोर्ड वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है। सेंट्रल, साउथ, नई दिल्ली, राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, कई दूतावासों, उत्तरी और पश्चिमी दिल्ली के हिस्सों में पानी की कमी हो सकती है। दिल्ली सरकार इसे ‘पानी इमर्जेंसी’ के तौर पर ले रही है। ऐसे में दिल्ली की प्यास बुझाने वाली मुनक नहर के बारे में जानना जरूरी हो जाता है।

जब नहर का पानी रोका गया

मुनक नहर टूटने से फिलहाल दिल्ली के 30 लाख लोगों पर असर हो सकता है। दिल्ली जल बोर्ड ने हरियाणा सिंचाई विभाग से कहा है कि इस स्थिति को आपातकाल की तरह लिया जाए। मुनक नहर की अहमियत इसी से समझ लीजिए कि कुछ साल पहले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान इस नहर का पानी रोक दिया गया था। इससे दिल्ली में पानी का संकट पैदा हो गया था। बाद में आंदोलन हुए तो नहर के पानी की सुरक्षा के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई। आंदोलनकारियों का कहना था कि दिल्ली का पानी रुकेगा तो उनकी बात सुनी जाएगी। सोनीपत में मुनक नहर में दरार आने से 200 एकड़ से ज्यादा जमीन डूब गई है। सड़क से लेकर खेतों में पानी भर गया है।

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