
इंटरनेट का उपयोग करने वालों को सावधान रहने की जरूरत है। स्कैमर्स बैंक, कोरियर, ट्रैवल और विभिन्न बुकिंग सेवाओं के नाम से फर्जी वेबसाइट बना चुके हैं। पिछले चार महीने में ही दो हजार लोगों को शिकार बनाया गया है। धोखाधड़ी का आंकड़ा चौंकाने वाला है। चार करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की शिकायत क्राइम ब्रांच तक पहुंच चुकी है। पुलिस ने ऐसी सौ से ज्यादा वेबसाइट तो बंद करवा दी हैं।
विजय नगर निवासी राजेश सिंह डाक्टर से अपाइंमेंट के लिए गूगल पर नंबर ढूंढ रहे थे। ‘डाक्टर अपाइमेंट’ के नाम से बनी एक वेबसाइट पर जैसे ही उन्होंने रजिस्ट्रेशन किया, खाते से 50 हजार रुपये निकल गए। धोखाधड़ी का यह मात्र एक नमूना है। पिछले चार महीने में दो हजार लोग इसी तरह की फर्जी वेबसाइटों से ठगी का शिकार हुए हैं। इंटरनेट स्कैमर्स ने अंतरराष्ट्रीय बैंक, ई-कामर्स वेबसाइट, ट्रैवल्स, डाक्टर अपाइंमेंट, कोरियर, इंवेस्टमेंट सहित फायनेंस कंपनियों की हूबहू फर्जी वेबसाइट बना ली हैं। उपभोक्ता जैसे ही इन साइटों में बैंक की जानकारी सबमिट करता है, खातों से रुपये निकल जाते हैं।
चार करोड़ की ठगी आई सामने
क्राइम ब्रांच के डीसीपी निमिष अग्रवाल ने बताया कि अभी तक करीब चार करोड़ रुपयों की धोखाधड़ी सामने आ चुकी है। प्रतिदिन आने वाली शिकायतों में सबसे ज्यादा इसी तरह की होती हैं। डीसीपी के अनुसार, करीब एक करोड़ रुपये तो साइबर सेल ने बचा लिए, लेकिन खाते और मोबाइल नंबर फर्जी होने से पुलिस ठगों तक नहीं पहुंच सकी है।
बैंक और ट्रैवल्स की भी फर्जी वेबसाइट बना चुके हैं जालसाज
डीसीपी (अपराध) निमिष अग्रवाल के अनुसार, डाक्टर अपाइंमेंट, कोरियर एक्टिवेशन, कस्टमर सपोर्ट, राधे-राधे ट्रैवल्स, महादेव ट्रैवल्स, रिलायंस फायनेंस, अमेजन शापिंग, फ्लिपकार्ट, ई-बे, क्वाइन स्विस, क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट और कई बैंकों की मिलते-जुलते नामों वाली करीब 100 वेबसाइट्स की जानकारी सामने आ चुकी है। साइबर एक्सपर्ट्स ने जांच की तो पता चला कि फर्जी वेबसाइट असली जैसी बनी हैं। इससे उपभोक्ता गच्चा खा जाते हैं। इन वेबसाइटों में जैसे ही उपभोक्ता मोबाइल नंबर, क्रेडिट या डेबिट कार्ड नंबर और बैंक की जानकारी सबमिट करते हैं, वे ठगों के जाल में फंस जाते हैं और खाते से रुपये निकाल जाते हैं।
एयरपोर्ट पर टैक्सी का इंतजार करते रहे कारोबारी
डीसीपी के अनुसार, एक कारोबारी ने ओंकारेश्वर एवं उज्जैन दर्शन करने के लिए एक ट्रैवल्स पर टैक्सी बुक की। ठग ने रुपये ले लिए और कहा कि एयरपोर्ट पर ड्राइवर मिल जाएगा। कारोबारी टैक्सी का इंतजार करते रहे। जिस नंबर से बुकिंग की उस पर कॉल किया तो बंद मिला। इसी तरह कोरियर सर्विस के नाम पर ठगी हो रही है। उपभोक्ता पार्सल की जानकारी लेने के लिए फर्जी वेबसाइट पर चले जाते हैं।
इन तरीकों से जाने वेबसाइट फर्जी तो नहीं
वेबसाइट पर विजिट करते समय उसके कंटेंट, प्राइवेसी पालिसी, टीम इन्फो, फोन, ई-मेल और गूगल लिस्टिंग को जांच कर लें।
नई वेबसाइट की रिटर्न पालिसी को भी ठीक तरह से पढ़ लें। उसका डोमेन नेम भी बारीकी से पढ़कर देख लें कि उसकी स्पेलिंग ठीक है या नहीं। सर्विस और प्रोडक्ट उपलब्ध करवाने वाली वेबसाइटों का रिव्यू भी पढ़े। ई-मेल, एसएमएस और इंटरनेट मीडिया पर आने वाली मैसेंजर, लिंक पर भरोसा न करें।

