- उत्तराखंड में मूसलधार वर्षा और भूस्खलन से इंदौर सहित भोपाल के तीन लोगों की मौत हो गई थी।
सोमवार शाम गंगोत्री दर्शन कर गाड़ी उत्तरकाशी रवाना हुई थी। गंगनानी पहुंचे ही थे कि झरने के साथ पहाड़ से पत्थर गिरने लगे। आगे जा रहे स्कूटर को देख ड्राइवर ने गाड़ी रोकी ही थी कि बड़ी-बड़ी चट्टानें गिरने लगीं। बगैर देर किए मैं कूद गया और कांच फोड़ कर बच्चों-महिलाओं को बाहर निकालने लगा। हम 21 लोग सवार थे। इनमें सात भोपाल और 16 इंदौर (उषा नगर, स्कीम-71) की थीं।
बुआ पुष्पा चौहान गाड़ी से बाहर निकली ही थी कि भारी भरकम चट्टान आ गिरी। चारों तरफ हाहाकार मच गया। एक अन्य कार चकनाचूर हो गई। दोनों तरफ से रास्ते बंद होने से मदद भी नहीं मिली। महिलाओं और बच्चों के सिर से खून बह रहा था। यात्रा करने आया एक लड़का हमारी मदद करने आया। वह एमबीबीएस का छात्र था। उसके पास दवाइयां थीं। घायलों का प्राथमिक उपचार किया और एक होटल पहुंचे।
पहाड़ जैसी रात गुजर रही थी। सुबह एनडीआरएफ और पुलिसवाले घायलों को अस्पताल ले गए। शोभा बाकलिया और उनके पोते सानिध्य को एम्स (ऋषिकेश) में भर्ती करवाया है। दोनों की हालत गंभीर है। उनके सिर में गहरी चोट आई है। घायल तो सभी हुए हैं, लेकिन मामूली चोट है।
गंगोत्री दर्शन कर लौट रहे थे यात्री
उषा नगर निवासी संतोष सोलंकी की रणजीत हनुमान मंदिर के सामने लांड्री है। उनके भाई भारत ने बताया कि संतोष, कीर्ति, सौम्य, छवि, महेश ढालिया, गोपाल, राधा, मनु, बंशीलाल, शोभा, सानिध्य, संतोष सहित कुल 21 लोग ट्रेन से गए थे। आगे जाकर गाड़ी की और गंगोत्री के दर्शन किए। लौटते वक्त हादसा हो गया। कुछ देर पहले ही बात हुई थी कि गंगोत्री से निकल गए हैं। रात को उत्तरकाशी में रुकेंगे। थोड़ी देर बाद ही अनहोनी की खबर आ गई।
