ED की शुरुआत 1 मई 1956 को हुई थी। तब वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स में विदेशी मुद्रा अधिनियम, 1947 (FERA) से जुड़े मामलों को देखने के लिए एक प्रवर्तन इकाई (Enforcement Unit) बनाई गई। इसका मुख्यालय दिल्ली में था और कलकत्ता व मुंबई में दो ब्रांच थीं। उस वक्त ED के डायरेक्टर लीगल सर्विस के अफसर हुआ करते थे।
सालभर बाद साल 1957 में प्रवर्तन इकाई का नाम बदलकर डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट या एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (Enforcement Directorate) रखा दिया गया और चेन्नई में एक और ब्रांच खोली गई।
साल 1960 में ED का प्रशासनिक कंट्रोल डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स से डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू को दे दिया गया। फिलहाल दिल्ली स्थित मुख्यालय के अलावा ED के मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता और दिल्ली में कुल 5 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। इसके अलावा 10 जोनल ऑफिस और 11 सब जोनल ऑफिस हैं।
किन कानूनों के तहत काम करती है ED?
ED मुख्य तौर पर आर्थिक अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों को देखती है। ED जिन कानूनों के तहत काम करती है उनमें- फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (Fema), धन सोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA), भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 (FEOA) और विदेशी मुद्रा का संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) शामिल हैं।
ED के पास क्या शक्तियां हैं?
ED के पास PMLA से लेकर FEMA जैसे कानून के तहत आने वाले मामलों में छापा मारने से लेकर, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने का अधिकार है।
यदि किसी थाने में 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की हेराफेरी की FIR दर्ज होती है तो पुलिस, ED को इसकी जानकारी देती है। इसके बाद ED इसकी जांच शुरू कर सकती है। इसके अलावा ED खुद किसी मामले का संज्ञान लेकर भी जांच शुरू कर सकती है। ED के पास बगैर पूछताछ के भी संपत्ति जब्त करने का अधिकार है।
