
24 फरवरी को शुरू हुई रूस-यूक्रेन जंग जारी है। दोनों देशों के सैनिक मारे जा रहे हैं। यूक्रेन का आंकड़ा तो सामने आता है, लेकिन रूस का नहीं। रूसी सैनिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं। उनके पास मशीन गन, कपड़े और जूते तक नहीं हैं। कई तो उम्रदराज हैं।
एक रूसी महिला के मुताबिक, जंग लड़नी है, लेकिन उसके लिए जरूरी सामान खुद खरीदना पड़ रहा है। दिक्कत यह भी है कि यूक्रेन में हमलों के खिलाफ रूस में कोई आवाज भी नहीं उठा सकता।
वेस्टर्न मिलिट्री एक्सपर्ट कहते हैं- पुतिन बिल्कुल नए रंगरूटों को मोर्चे पर भेज रहे हैं। इन्हें तो ट्रेनिंग तक नहीं ठीक से नहीं मिली और न ही जंग लड़ने के लिए जरूरी सामान है। मारे गए रूसी सैनिकों का आंकड़ा तो किसी के पास मौजूद नहीं, लेकिन रूस में उसके सैनिकों के ताबूत ही ज्यादा लौट रहे हैं।
जंग का तर्जुबा ही नहीं
- डिफेंस एक्सपर्ट विलियम अल्बुकर्क कहते हैं- रूसी सैनिकों को दुश्मन के सामने किसी चारे की तरह फेंक दिया गया है। हालात कितने खराब हो गए हैं, इसकी एक मिसाल शनिवार को सामने आई। दो पूर्व रूसी सैनिकों ने मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर पर फायरिंग की। 11 लोग मारे गए और 15 घायल हो गए।
- रूस दो मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। पहला- उसके पास तैनाती के लिए जरूरी सैनिक नहीं हैं। दूसरा- अगर सैनिक हैं तो ट्रेनिंग और इक्युपमेंट की कमी है। हजारों सैनिकों को बंदी बनाया जा चुका है।
- मिलिट्री ब्लॉगर एनेस्तेसिया काशेवारोवा कहती हैं- नौसिखिओं को मोर्चे पर तैनात किया जा रहा है। चेलेयाबिंस्क, येक्तेरिनबर्ग हो या मॉस्को। इन शहरों में सिर्फ ताबूत ही लौट रहे हैं। क्या आप बताएंगे कि इन सैनिकों को कितनी ट्रेनिंग दी गई थी।
आवाज उठाओ तो मुश्किल
- पुतिन के जिद के खिलाफ अगर रूसी आवाज उठाएं तो उन्हें जेल में डाल दिया जाता है, मोटा जुर्माना भरना पड़ता है। अब तो फौज के खिलाफ आवाज उठाने पर भी सजा दी जा रही है।
- पिछले हफ्ते पुतिन ने माना था कि 16 हजार नए रिक्रूट्स को मोर्चे पर तैनात किया गया है। इनमें से कुछ को तो महज 5 से 10 दिन की ही कॉम्बेट ट्रेनिंग दी गई है। यूक्रेन में जंग का दायरा करीब 700 किलोमीटर में फैला है।
- पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक रूसी सैनिक कहता है- हमारे रेजीमेंट कमांडर ने तैनाती के पहले हमें शूटिंग प्रैक्टिस तक नहीं कराई। ऐसे ही एक और वीडियो में एक सैनिक कहता है- हम हफ्तों से बहुत बुरे हालात में रह रहे हैं। तैनाती की यूनिट तक नहीं बताई।
बुनियादी सुविधाएं भी नहीं
- यूक्रेन से लगने वाली बेलगोरोद शहर की सीमा के पास ही है कुर्स्क रीजन। यहां के गवर्नर रोमन स्तेरोवित कहते हैं- ट्रेनिंग सेंटर्स में से कई ऐसे हैं जहां बिल्डिंग टूटी हुई हैं। नहाने के लिए सही शॉवर्स नहीं हैं। बेड्स और यूनिफॉर्म तक नहीं हैं।
- गुरुवार को यूक्रेन में पांच रूसी सैनिक मारे गए थे। इनमें से एक के रिश्तेदार ने कहा- इन्हें दुश्मन के सामने मीट की तरह परोस दिया गया। किसी के पास जंग की कोई ट्रेनिंग ही नहीं थी।
- रूस की एक जर्नलिस्ट नताल्या लोसेवा कहते हैं- हमारी मिलिट्री लीडरशिप सिर्फ जबरिया तैनाती कर रही है। ब्रिटिश डिफेंस मिनिस्ट्री ने भी हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि रूसी सैनिकों की तैयारियां और अनुशासन बेहद घटिया है।
रूसी सरकार का दावा
रूस के डिफेंस मिनिस्टर सर्गेई शोइग्यू ने पिछले दिनों कहा था- 2 लाख सैनिक 80 ट्रेनिंग सेंटर्स में मौजूद हैं। पुतिन ने शुरुआत में तो 3 लाख सैनिकों की तैनाती की बात कही थी। बाद में वो 2 लाख 20 हजार पर आ गए। एक अनुमान के मुताबिक, रूस ने जंग की शुरुआत में 2 लाख सैनिक तैनात किए थे। इनमें से आधे से ज्यादा या करीब एक तिहाई या तो मारे जा चुके हैं, या फिर गंभीर रूप से जख्मी हैं।
दूसरी तरफ, रूसी फौज ऐसे वीडियो जारी कर रही है, जिनसे लगता है कि रूस जंग जीतने ही वाला है और सैनिक बहुत खुश हैं। पूर्व एयरफोर्स ऑफिसर ग्लेब इरिसोव कहते है- रूस ने कई मिलिट्री एक्सपर्ट्स इस जंग में गंवा दिए हैं। नए सैनिकों को ट्रेनिंग देने वाले ही नहीं बचे।

