ब्रिटेन में फिर प्रधानमंत्री चुनाव:24 अक्टूबर को नामांकन का आखिरी दिन; ब्रिटेन में ‘ये दिवाली भारत वाली’ की गूंज

By Abhishek Raghuvanshi
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ब्रिटेन से भारत के लिए जल्द ही अच्छी खबर आ सकती है। नए प्रधानमंत्री पद की रेस में भारतवंशी सांसद ऋषि सुनक का सितारा बुलंद दिखाई दे रहा है। लिज ट्रस के इस्तीफे के बाद सुनक की मजबूत दावेदारी से इस बार ब्रिटेन में ‘ये दिवाली भारत वाली’ की गूंज है।

45 दिन पहले हुए चुनाव में सुनक को कंजरवेटिव पार्टी के स्थायी सदस्यों की वोटिंग में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब सुनक का पलड़ा भारी है। आलम ये है कि पूर्व PM जॉनसन ने बैकडोर से सुनक को नंबर-2 का ऑफर दिया है, लेकिन सुनक कैंप का कहना है कि जब वे पहले भी वित्तमंत्री के रूप में रह चुके हैं तो इस ऑफर को स्वीकार क्यों करें। सुनक खुद ही प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होंगे।

पेनी हो सकती हैं सुनक या जॉनसन की नंबर-2
फिर होने वाले चुनावों में तीन सांसदों के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। इनमें सुनक के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस की स्पीकर पेनी मॉरडॉन्ट हैं। पेनी मॉरडॉन्ट को सुनक या जॉनसन का नंबर-2 माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पावर ट्राइएंगल में पेनी, सुनक या जॉनसन के खेमे में जा सकती हैं। वैसे पेनी भी बतौर प्रधानमंत्री अपनी उम्मीदवारी को जोरशोर से रख रही हैं।

इस बार नए नियम

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  • प्रत्याशी को 100 सांसदों का समर्थन जरूरी, पिछली बार 20 सांसद जरूरी।
  • पार्टी के स्थायी सदस्य बैलेट से नहीं ऑनलाइन वोटिंग करेंगे।
24 अक्टूबर को यदि सुनक को ही 100 से ज्यादा सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो वो प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

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पिछला सबक
ट्रस से पिछले मुकाबले में सुनक ने कंजरवेटिंग पार्टी के स्थायी सदस्यों की वोटिंग से बड़ा सबक लिया है। वे इस बार मुकाबले को पार्टी सदस्यों की वोटिंग तक नहीं ले जाना चाहते हैं। सांसदों की वोटिंग में सुनक आगे रहे थे। पार्टी सदस्यों की वोटिंग में सुनक को 60,399 और ट्रस को 81,326 वोट मिले थे। सुनक खुद के 100 सांसद और प्रतिद्वंद्वी के 100 से कम रखने की रणनीति में हैं।

बैंकर की छवि
बतौर PM ट्रस के विफल रहने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक मोर्चे पर विफल रहना था। सुनक प्रोफेशनल बैंकर रहे हैं। जॉनसन सरकार में भी वित्त मंत्री रह चुके। उनके द्वारा जनता के सामने रखे गए ब्रिटेन के इकोनॉमिक बेल आउट प्लान को मिडिल क्लास ने खासा सराहा था। ऐसे में सुनक खुद को बैंकर राजनेता के रूप में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

चुनाव का खतरा
बार-बार PM बदलने से सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी की छवि खराब हो रही है। विपक्षी लेबर पार्टी की लोकप्रियता 25% बढ़ गई है। ब्रिटेन में नए चुनाव के लिए दो साल का समय है। सुनक खुद को लंबी रेस का घोड़ा बता कर पार्टी सांसदों को जल्द चुनाव का खतरा बता रहे हैं। सांसदों का भी मानना है कि यदि सुनक से स्थायित्व आता है तो उनकी सांसद के रूप में टर्म पूरा होगा।

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