करीब 16 महीने पहले अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर चुके तालिबान शासन को दुनिया ने मान्यता नहीं दी है। उसकी माली हालत बदतर है। इससे उबरने में वह भारत की मदद चाहता है। इसी कारण तालिबान शासन ने भारत से निवेश की गुहार लगाई है। उसके नेताओं ने आग्रह किया है कि भारत बगैर समुद्री तट वाले अफगानिस्तान में सड़क जैसी बुनियादी परियोजनाओं में निवेश करे।
इस दायरे में निजी क्षेत्र भी शामिल किया जाए। ऐसी परियोजनाओं में निवेश से रोजगार पैदा होंगे और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। तालिबानी नेताओं ने यह गुहार हाल ही में भारतीय तकनीकी मिशन के प्रमुख के साथ बैठक के दौरान लगाई। इसमें तालिबान शासन ने कहा कि भारतीय कारोबारी शहरी और आवास खासकर न्यू काबुल सिटी परियोजना में अपनी भागीदारी निभाएं।
उधर, तालिबान राज में पाकिस्तान पस्त पड़ता जा रहा है। उसे उम्मीद थी कि तालिबान राज में वह पर्दे के पीछे से राज करेगा। इसीलिए तालिबान की खुलकर मदद की। तब से लेकर आज तक उसके लिए स्थिति खराब हो चुकी है।
भारत की 20 परियोजनाएं फिर शुरू होने के आसार
न्यूज चैनल टोलो न्यूज का दावा है कि अफगानिस्तान में भारत 20 रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू कर सकता है। शहरी विकास और आवास मंत्रालय (MUDH) ने कहा कि भारतीय प्रभारी भारत कुमार ने संबंधों को सुधारने और अफगानिस्तान में दिल्ली की परियोजनाओं को फिर से शुरू करने में भारत की रुचि दिखाई।
कुमार ने शहरी विकास और आवास मंत्री हमदुल्ला नोमानी के साथ बैठक में यह टिप्पणी की। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भारत को अपने सभी प्रोजेक्ट बंद करने पड़े थे। तालिबानी कब्जे से पहले भारत ने दो दशक में अफगानिस्तान में करीब 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया। इसके तहत 400 से अधिक परियोजनाएं अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में शुरू की गई थीं। ये फिलहाल बंद पड़ी हैं।
काबुल में पाकिस्तानी राजदूत को जान से मारने की कोशिश
अफगान सीमा पर जहां पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनातनी और गोलीबारी की स्थिति है। तालिबान ने पाकिस्तान को अलग करने वाली डूरंड लाइन को मानने से इनकार कर दिया है। तालिबान राज में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आतंकियों ने पाकिस्तान पर हमले तेज कर दिए हैं। राजधानी काबुल में पाकिस्तानी राजदूत को जान से मारने की कोशिश हुई है।
जापान ने दूतावास खोलने पर भारत की राय ली
बीते कुछ समय में भारत बहुत तेजी से तालिबान सरकार में अपनी पकड़ को मजबूत कर चुका है। भारत के हरी झंडी दिखाने के बाद अब जापान भी अफगानिस्तान में दूतावास खोलने जा रहा है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जापान ने इस साल जब फिर से दूतावास खोलने के बारे में सोचा तो उसने भारत से सलाह ली थी, ताकि जमीनी हालात की सटीक जानकारी ली जा सके।
ड्रैगन एंगल: चीन से सिल्क रोड पर बात
तालिबान अर्थव्यवस्था में मदद करने के लिए प्राचीन सिल्क रोड कारोबारी मार्गों को फिर से शुरू करने के लिए चीन से बातचीत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के उद्योग- वाणिज्य मंत्री नूरुद्दीन अजीजी ने इस बारे में चीन से प्रयास तेज करने को कहा है।
