UN मीटिंग में न जाना मोदी की रणनीति:यह रूस पर अमेरिकी एजेंडे के सामने न झुकने का मैसेज, प्रतिबंध के बावजूद तेल भी खरीदा

By Abhishek Raghuvanshi
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संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं जा रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर जनरल असेंबली में शिरकत करेंगे। दरअसल भारतीय प्रधानमंत्री के इसमें शामिल न होने के पीछे खास वजह है। यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने रूस से तेल और गैस की खरीदी पर प्रतिबंध लगाया था। भारत ने इस पाबंदी को मानने से न सिर्फ इनकार किया, बल्कि रूस से तेल और गैस का सौदा भी किया।

इस बार संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग का एजेंडा रूस पर पाबंदियों में सख्ती लाना ही है। ऐसे में मीटिंग से दूर रहकर भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस पर पश्चिम का एजेंडा थोपे जाने के सामने नहीं झुकेगा। भारत और चीन ही ऐसे देश हैं, जो अमेरिका और यूरोप के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस से व्यापार जारी रखे हुए हैं। इससे रूसी अर्थव्यवस्था को काफी सहारा मिला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस मीटिंग में नहीं आएंगे।

कोविड के चलते दो साल बाद पहली बार होगी UNGA की मीटिंग
कोविड-19 के दौर के बाद (दो साल बाद) तमाम राष्ट्राध्यक्षों को इस प्लेटफॉर्म पर पहली बार मिलने का मौका मिला है। हालांकि, दुनिया के तीन बड़े नेता मोदी, पुतिन और जिनपिंग यहां नहीं आएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन जरूर यहां मौजूद रहेंगे। बाइडेन को पहले भाषण देना था, लेकिन वो क्वीन एलिजाबेथ के अंतिम संस्कार में शामिल होने लंदन गए थे। लिहाजा, अब ब्राजील के बाद उनका भाषण 21 सितंबर, यानी बुधवार को होगा।

पुतिन और जिनपिंग दोनों UNGA में शामिल नहीं होंगे। चीन-रूस का अमेरिका से तनाव चल रहा है। यूक्रेन के मुद्दे पर चीन ने रूस का समर्थन किया है। (फाइल)

मोदी ने UN को 5-S फॉर्मूला दिया था, जयशंकर इस पर बात करेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UN को कुछ वक्त पहले 5-S फॉर्मूला दिया था। इसके एलिमेंट थे- सम्मान (Respect), सम्वाद (Dialogue), सहयोग (Cooperation), शांति (Peace) और समृद्धि (Prosperity)। विदेश मंत्री एस जयशंकर 24 सितंबर को इस पर विस्तार से बात करेंगे। वो करीब 50 दूसरी मीटिंग्स में भी हिस्सा लेंगे। इनमें कुछ बाइलेटरल, यानी द्विपक्षीय होंगी। जयशंकर 18 सितंबर को ही न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। उनका भाषण 24 सितंबर को होगा। 28 सितंबर तक वो अमेरिका में रहेंगे।

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मोदी 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए न्यूयॉर्क गए थे। इसके बाद दो साल तक कोविड रहा। इस बार प्रधानमंत्री नहीं जा रहे हैं। (फाइल)

बाढ़ से निपटने के लिए दुनिया से मदद मांगेंगे पाकिस्तानी PM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जनरल असेंबली में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। वे मुल्क में बाढ़ से हुई तबाही के बेस पर दुनिया से मदद मांगेंगे और क्लाइमेट चेंज का जिक्र करेंगे। शरीफ पहले भी कह चुके हैं कि अमीर मुल्कों ने क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए कुछ नहीं किया और गरीब देश इसकी कीमत चुका रहे हैं। वो खुद यह कह चुके हैं। अगर वे कश्मीर का मुद्दा उठाते हैं, तो अगले दिन जयशंकर इसका जवाब देंगे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ UNGA में बाढ़ से हुई तबाही पर दुनिया से मदद मांगेंगे। कश्मीर का राग भी अलाप सकते हैं। (फाइल)

जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल फूड शॉर्टेज पर फोकस
इस मीटिंग में जियोपॉलिटिकल टेंशन, क्लाइमेट क्राइसिस और ग्लोबल फूड शॉर्टेज पर फोकस रहेगा। जियोपॉलिटिकल टेंशन की बात करें तो सबसे ज्यादा तरजीह रूस-यूक्रेन जंग पर है। इसकी वजह से ग्लोबल फूड शॉर्टेज का खतरा सामने आया। पाकिस्तान में बाढ़ की वजह से भारी तबाही आई। वो इसकी वजह क्लाइमेट चेंज बता रहा है। 150 डेलिगेट्स इन मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे।

UN जनरल असेंबली में 193 मेंबर्स, सबके अधिकार बराबर
UNGA, यूनाइटेड नेशंस के 6 मुख्य अंगों में से एक है। UN के सभी 193 सदस्य बराबर अधिकारों और जिम्मेदारी के साथ इसका हिस्सा हैं। UN के बजट, सिक्योरिटी काउंसिल की सदस्यता, अस्थायी सदस्यों की नियुक्ति जैसे सभी काम जनरल असेंबली के जिम्मे हैं। इसका काम इंटरनेशनल पीस और सिक्योरिटी पर चर्चा करना है। इनमें विकास, मानवाधिकार, इंटरनेशनल लॉ और देशों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से विवादों का निपटारा करना शामिल है। हर साल न्यूयॉर्क में UN हेडक्वार्टर में जनरल असेंबली की मीटिंग होती है। 10 जनवरी 1946 को इसकी पहली मीटिंग हुई थी।

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