आरोप- कोर्ट में आश्वासन दिया था फिर भी विधानसभा पटल पर नहीं रखी रिपोर्ट।
पूरे देश में चर्चा का विषय बना मंदसौर गोलीकांड एक बार फिर हाई कोर्ट पहुंच गया है। इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर हुई है। इसमें कहा है कि शासन ने कोर्ट के समक्ष आश्वासन दिया था कि मंदसौर गोलीकांड की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट मिलते ही विधानसभा पटल पर रखी जाएगी। रिपोर्ट 2018 में ही आ चुकी है। शासन के आश्वासन को भी चार साल बीत चुके हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। याचिका में मांग की गई है कि रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में युगलपीठ के समक्ष याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होना है।
गौरतलब है कि 6 जून 2017 को मंदसौर में किसान और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस के गोली चलाने से छह किसानों की मौत हो गई थी। यह मामला पूरे देश में चर्चित रहा था। इस संबंध में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका दायर हुई थी। इसके बाद शासन ने मृतकों के स्वजन को एक-एक करोड़ रुपये दिए थे। शासन ने यह आश्वासन भी दिया था कि जांच के लिए बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी जाएगी। इसके बावजूद रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने एडवोकेट प्रत्युष मिश्रा के माध्यम से एक नई जनहित याचिका दायर की है। इसमें जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
सिलावट के खिलाफ चुनाव याचिका में सुनवाई जुलाई में
इधर केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट के खिलाफ हाई कोर्ट में चल रही चुनाव याचिका में सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह तक आगे बढ़ गई। याचिकाकर्ता और सिलावट दोनों के वकीलों ने आपसी सहमति से इसे बढ़ा लिया। याचिका में सिलावट के 2018 में हुए निर्वाचन को चुनौती दी गई है।
