इंदौर शहर में भू माफियाओं पर नकेल कसने को लेकर जिला प्रशासन लगातार कई तरह की योजनाओं पर कार्य कर रहा है और कई भू माफियाओं को सलाखों के पीछे भी भेज चुका है तो वही जमीनों के कई मामले ऐसे हैं जो वर्षों से अटके पड़े हैं जिनका निराकरण आज तक नहीं होने से दो पक्षों में वाद विवाद की स्थिति लगातार बन रही है ऐसा ही एक मामला इंदौर शहर के नगर निगम वार्ड नंबर 7 के जोन क्रमांक 1 स्थित नीलकंठ कॉलोनी से सामने आया है जहां रहवासियों का आरोप है कि बगीचे पर अवैध रूप से दीवार बनाकर कुछ लोगों द्वारा कब्जा करने की कोशिश की जा रही है क्षेत्र के यंग इंडिया क्लब नीलकंठ कॉलोनी राधा नगर कॉलोनी सहित कई कॉलोनियों के रहवासियों द्वारा लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके क्षेत्र के बगीचे पर कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है नीलकंठ कॉलोनी के रहने वाले श्याम अग्रवाल ने बताया कि बीते दिन भी कुछ लोग आए और खंबे लगाकर कब्जे की कोशिश कर रहे थे लेकिन वह वासियों ने उन मजदूर वर्ग के लोगों को भगा दिया अग्रवाल की माने तो फिलहाल किसी के नाम सामने नहीं आए हैं मजदूर वर्ग जैसे लोग वहां आते हैं और कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं इसी तरह क्षेत्र के रमेश सेन विनोद मेहरा ने भी कहा कि उनके क्षेत्र की कॉलोनी के बगीचे की जमीन लंबे समय से खतरे में है यदि क्षेत्रीय रहवासी ध्यान नहीं दे तो यहां कभी भी रातों-रात भवन खड़ा हो सकता है उन्होंने शासन प्रशासन के लोगों से ऐसे कब्जा करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है और बगीचे की जमीन पर बगीचा बनवाने की निगम से मांग रखी है।
करीब 35 वर्ष पुराना मामला है जांच हो रही है – निगम अधिकारी
नीलकंठ कॉलोनी सहित अन्य कालोनियों के निवासियों के विरोध प्रदर्शन के बाद हमने जब नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर श्री तन्मय से बात की तो उन्होंने इस मामले को काफी पुराना मामला बताया और कहा कि वहां जो भी लोग कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे उन्हें फिलहाल रोक दिया गया है जो लोग वहां भवन निर्माण कर रहे थे उनका कहना है कि वह जमीन उन्हें लोखंडे पुल पर निगम को दी गई जमीन के बदले में निगम ने आवंटित की है। हालांकि यह मामला करीब 35 से 35 साल पुराना बताया जा रहा है जिसकी जांच भी जारी है। वही बिल्डिंग इंजीनियर विवेक जैन ने कहा कि जत्ती कॉलोनी लोखंडे पुल से निकले नाले के दौरान पुल निर्माण के दौरान वर्षों पूर्व जमीन के बदले नगर निगम ने संभवत यह जमीन कुछ लोगों को दी थी जिस पर अब वह भवन निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं हालांकि मामले में अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि यह जमीन किसकी है हालांकि निगम की जांच मामले में जारी है
