सिख समाज के कार्यक्रम में कमलनाथ का भारी विरोध

By Abhishek Raghuvanshi
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गुरु नानक देव के जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में उस समय सन्नाटा छा गया जब ख्यात कीर्तन कार मनप्रीत सिंह कान पुरिया मैं समाज के सचिव राजा गांधी द्वारा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बुलाया और स्वागत किया गया स्वागत समारोह के समाप्त होते हैं जैसे कमलनाथ जाने के लिए खड़े हुए तो कीर्तन के लिय बैठे कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरिया उग्र हो गए और हज़ारों की संख्या में मौजूद समाज जनों के बीच उन्होंने बग़ैर किसी का नाम लिए कमलनाथ का विरोध करते हुए समाज १९८४ में हुए सिख विरोधी दंगों की याद दिला दी

इसके बाद पूरे कार्यक्रम में सन्नाटा सा पसर गया समाज के लोगों द्वारा जो बोले सो नीहाल जयकारा लगाया गया तो इस पर भी वह समाज जनों को रोक दें और अपनी बात पूरी करते नज़र आए इस बूढ़े व्याख्या के दौरान कीर्तन कार मनप्रीत सिंह कानपुरियाँ मैं कमलनाथ को लेकर अपना ख़ासा आक्रोश समाज के बीच ज़ाहिर किया साथ ही उन्होंने गुरु गोबिन्द सिंह जी की क़सम खाकर कभी इंदौर नहीं आने तक की बात कह डाली

दरअसल इन धार्मिक गुरु नानक जयंती के पावन पर्व पर सिक्ख समाज द्वारा खालसा स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया गया था इस कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को आमंत्रित किया गया था कार्यक्रम में समाज की ओर से सचिव राजा गांधी द्वारा कमलनाथ की तारीफ़ में कई तरह के क़सीदे पढ़े जा रहे थे इस दौरान कार्यक्रम में आए कीर्तन कारी मनप्रीत सिंह कानपुरिया द्वारा कमलनाथ का विरोध किया गया यह पूरे कार्यक्रम में मानो सन्नाटा सा छा गया कार्यक्रम में कीर्तन कारी ने समाज के सचिव राजा गांधी को जमकर फटकार लगाते बोला शर्म करो गांधी जिसने सिक्खों के घर बर्बाद कर दिये जो१९८४ का दोषी है जो उसके गुण गान गा रहे हो

क्या कहा कीर्तनकार मनप्रीतसिंह कानपुरिया ने

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कौन से सिद्धांतों की बात करते हो जिन्होंने तुम्हें टायर डालकर जलाया फिर भी तुम नहीं सुधरते हो

इस दौरान जयकारा लगा लेकिन लोगों को जयकारा लगाने से रोकते हुए बोले

कौन सी तुम्हें राजनीति करनी है तुम्हारे अंदर ज़मीर है ही नहीं मरी कॉम है हमारी

पास कुछ है ही नहीं याद रखो मेरी बात दोबारा भुगतोगे तुम्हें बात समझ नहीं आती तो क्या मैं लडु

तुमने क्यों पगड़ियाँ पहनी है उतार दो कृपाण उतार दो

तुमने तुम माँ की दाल खा कर तुम्हारा दिमाग़ भी माँ की दाल जैसा बन गया

जिन्होंने तुम्हारी पगड़ी उतारी उन्हें सम्मान दे रहे हैं

चाहे जिसे पीले सिरोपा दे देते हो पीले सिरोपा की वैल्यू पता है गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पूरावंश वॉर कर पीले परने की वैल्यू रखी

तुमने यहाँ हर किसी को देकर रौंद दिया

इसके बाद भी कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरिया का आक्रोश शांत नहीं हुआ तो उन्होंने कहा मैं कीर्तन नहीं करूँगा मुझे माफ़ करें मैं दोबारा इंदौर नहीं आऊँगा तुम बुज़दिल हो सचिव राजा गांधी आदि ने कीर्तन के लिए कहा तो जवाब में कहा कि मैं गुरु गोबिन्द सिंह जी का बेटा हूँ क़सम खाता हूँ दोबारा इंदौर नहीं आऊँगा मैं ग़लत हुआ तो मैं भुगतूँगा तुम हुए तो बाबा तुम्हें देखेगा

ग़ौरतलब है कि देश में पहली बार सिख समाज के किसी बड़े कार्यक्रम में इस तरह से कांग्रेस और कांग्रेस के प्रतिनिधियों का विरोध देखने को मिला है पूर्व में भी इस विषय को लेकर कई बार चर्चा होती रही है लेकिन इस तरह सिख समाज के बड़े कार्यक्रम में हज़ारों समाज जनों के मौजूदगी में सन 84 के दंगो को लेकर किसी का आक्रोश शायद पहली बार ही देखने को मिला इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला चर्चा का विषय है

इस मामले को लेकर भाजपा केऋषि खनुजा ने बताया कि समाज के कार्यक्रम में हज़ारों की भीड़ में कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरिया ने अपना दर्द बयां किया तो कमलनाथ की तारीफ मे कसिदे पढ़ने वालों के चेहरे की हवाइया उड़ी हुई थी कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरिया ने आज समाज को असलियत से रुबरु कराया

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