खोए हुए पुत्र की मन्नत मांगने आए महाकाल, वहीं मिला पुत्र: पिता ने कहा- बाबा ने आशीर्वाद देने उज्जैन को बुलाया

By Abhishek Raghuvanshi
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इसे चमत्कार कहे या संयोग… एक भक्त 800 किलोमीटर दूर से उनके दर पर पहुंचता है। अपने लापता बेटे को मिलाने की मन्नत करता है। फिर कुछ ऐसा होता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की। उसका खोया हुआ बेटा उसकी आंखों के सामने होता है।

किसी फिल्म की तरह लगने वाली ये कहानी उत्तरप्रदेश के कासगंज के रहने वाले श्रीकृष्ण कुमार की है। 5 महीने पहले मानसिक रूप से कमजोर उनका बेटा अचानक लापता हो गया था। परिवार ने उसे बहुत खोजा, लेकिन कहीं कोई पता नहीं चला। बेटे के गुम हो जाने से दुखी पिता ने सबकुछ भगवान महाकाल पर छोड़ दिया। वह बाबा महाकाल से बेटे को मिलाने की गुहार लगाने यूपी से उज्जैन पहुंचे।

महाकाल दर्शन के कुछ देर बाद ही उनका खोया हुआ बेटा उनकी आंखों के सामने आ जाता है। बेटे को पाकर पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़ते है। पिता बस इतना ही कह पाए कि भगवान महाकाल ने आशीर्वाद देने के लिए ही उज्जैन बुलाया था।

गुम हुए युवक का नाम पंकज (उम्र- 17 साल) है, जो कि यूपी के रामसिंहपुरा सोरो जिला कासगंज का रहने वाला है। उसके पिता श्रीकृष्ण कुमार मजदूरी करते हैं। पंकज 5 भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा है। वह मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर है। बेटे की हालत को देखकर पिता ने कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

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ऐसे लापता हुआ था पंकज…
पिता ने बताया कि पांच महीने पहले पंकज छत पर सो रहा था। सुबह उठे तो वह नजर नहीं आया। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण हम परेशान हो गए। उसे पहले तो गांव में, फिर आसपास के जिलों में खोजा। नहीं मिलने पर अलीगढ़, बरेली और दिल्ली में रहने वाले परिजनों के घर भी उसे खोजते हुए पहुंचे। हालांकि उसका कहीं पता नहीं चला।

महाकाल की चौखट पर ऐसे पहुंचा पिता
उत्तर प्रदेश से महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे पवन समाधिया ने बताया कि बाबा महाकाल के दर्शनों के लिए हम आ रहे थे। खेत पर काम करने वाले श्रीकृष्ण ने बेटे के गुम होने के बारे में जानकारी दी थी। उसने बताया था कि उसके परिवार ने बेटे के मिलने पर बाबा महाकाल के दर्शन की मन्नत मांगी है। मैंने सोचा उसे भी ले चलूं। दर्शनों के साथ वह बेटे पंकज के लिए भगवान महाकाल से कामना कर लेगा। बेटे को पाने के लिए बाबा का आशीर्वाद लेने वह भी हमारे साथ आ गया।

आश्रम तक पहुंचने की कहानी भी जान लीजिए
समाधिया ने बताया कि वे उज्जैन आते-जाते रहते हैं। उन्हें किसी ने बताया था कि अंकित ग्राम स्थित सेवाधाम आश्रम में बेसहाराओं को पनाह दी जाती है। यहां पहुंचकर हमने सबसे पहले बाबा महाकाल के दर्शन किए फिर सोचा श्रीकृष्ण इतनी दूर आया है तो क्यों न एक बार आश्रम में जाकर पता कर लें। हम शहर से 14 किमी दूर आश्रम पहुंचे और संस्थापक सुधीर भाई गोयल से मिले। फोटो दिखाते हुए बताया कि 5 महीने पहले बेटा खो गया था। इसके बाद जो पता चला उससे श्रीकृष्ण की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का खोया बेटा पिछले तीन महीने से इसी आश्रम में रह रहा है।

सेवाधाम आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल से आशीर्वाद लेकर पंकज अपने पिता के साथ अपने घर लौटा।
अब जान लीजिए आश्रम तक कैसे पहुंचा पकंज?

मानसिक रूप से कमजोर पंकज 29 जुलाई 2022 को उज्जैन में हीरा मील की चाल रोड पर दयनीय हालत में पड़ा हुआ था। उसे देख चाइल्ड-लाइन ने देवास गेट पुलिस को सूचना दी। बच्चे को बाल कल्याण समिति उज्जैन में प्रस्तुत किया गया। यहां से सेवाधाम आश्रम द्वारा संचालित श्री रामकृष्ण बालगृह में भेज दिया गया। तब बच्चे के हाथ पर चोट लगी हुई थी। काफी प्रयास के बाद उसने अपना नाम पंकज निवासी उत्तरप्रदेश बताया था। यहां तक आने का जरिया पूछने पर इतना ही बता पाया था कि वह ट्रेन में सवार हुआ था, उसके बाद नीचे गिरा। उज्जैन कैसे पहुंचा, उसे नहीं पता। हां उसने अपने हाथ में उज्जैन आकर महाकाल लिखवाया था।

महाकाल दर्शन करने आए और बेटा मिल गया
सेवाधाम आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल ने बताया कि बुधवार को सुबह-सुबह आश्रम के मुख्य द्वार पर उत्तर प्रदेश के कुछ लोग पूछताछ के लिए आए थे। उन्होंने मुझसे मिलने की इच्छा जताई। बातचीत में उन्होंने पांच महीने पहले बेटे के खो जाने का जिक्र किया। फोटो भी साथ लेकर आए थे। मैंने फोटो देखकर बताया कि वह इसी आश्रम में है।

सेवाधाम आश्रम के संस्थापक सुधीर भाई गोयल ने पिता-पुत्र को उनके घर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया।
महाकाल का आशीर्वाद मिल गया

बेटे से मिलते ही पिता श्रीकृष्ण की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। उसके पास आते ही उन्होंने उसे गले से लगा लिया। उन्होंने सुधीर भाई को धन्यवाद करते हुए कहा- आपने मेरे घर से भी ज्यादा अपने बालक समान बेटे को सुरक्षा दी। भगवान महाकाल की कृपा से बेटे का पूरा जीवन ही बदल गया है। यह चमत्कार है। बाबा महाकाल ने आशीर्वाद देने ही उज्जैन बुलाया था। इसके बाद दोनों अपने घर के लिए रवाना हो गए।

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