719 करोड़ के MPSIDC महाघोटाले में फंसे पूर्व मुख्य सचिव एसआर मोहंती को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है . पहले जबलपुर हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को सही बताते हुए मोहंती के खिलाफ चल रही जांच को बंद करने की अनुमति नहीं दी, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी केट ने मोहंती ने फौरी राहत हासिल कर ली थी मगर हाईकोर्ट आदेश के चलते उनके खिलाफ चल रही जांच जारी रही और अब मोहंती की विभागीय जांच का जिम्मा रिटायर्ड जज के के त्रिवेदी को सौंपा है . सामान्य प्रशासन विभाग ने कल इस संबंध में आदेश जारी कर दिए . MPSIDC घोटाले में फंसे मोहंती अन्य विवादित प्रकरणों के चलते भी चर्चित रहे हैं , खासकर हनी ट्रैप के मामले में भी उन पर उंगलियां उठी थी . सुरेंद्र संघवी सहित इंदौर के ही कई उद्योगपतियों को उन्होंने बोगस करोड़ो के लोन बांट दिए और 719 करोड़ की टोपी सरकार को पहना दी , ब्याज-बट्टे सहित ये राशि 4 हजार करोड़ से ज्यादा हो गई है . अग्निबाण शुरुआत से ही इस घोटाले से जुड़ी कई खबरें प्रकाशित करता रहा है , जिसमें कई खुलासे भी किये गए , जैसे इंदौर की एक फर्म को फोन पर ही 5 करोड़ दिलवा दिए . EOW की जांच रिपोर्ट में भी मोहंती ने किस तरह खेल किये , उसका खुलासा किया गया था . संघवी की सिद्धार्थ ट्यूब्स , बाहेती की स्टील ट्यूब ऑफ इंडिया , भंडारी की अल्पाइन , भानु आयरन , माया स्पिनर्स , ईशर ग्रुप , शराब किंग सोम समूह सहित 29 उद्योगों को ये फर्जी लोन बांटे गए . इंटर कार्पोरेट डिपॉजिट स्कीम के तहत शुरू की गई ये स्कीम हकीकत में सुनियोजित कार्पोरेट लूट थी , जिसके सरगना मोहंती निकले . भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिलहाल तो इस महाघोटाले की जांच करवा रहे है हालांकि विगत कई वर्षो से ये महाघोटाला फाइलों और जांच नौटंकियों में ही उलझा रहा .. अब देखना यह है की विभागीय जांच कितनी ईमानदारी से हो पाती है और मोहंती को क्या सजा मिलती है ? @ *
