सोलर पैनल से प्लांट संचालन पर होने वाली बिजली का खर्च होगा कम

By Abhishek Raghuvanshi
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Reverse' solar panel technology still works when the sun goes down |  Euronews

इंदौर। टेन्चिंग ग्राउंड में तैयार हुए 550 टन गीले कचरे से 17500 किलो बायो सीएनजी प्लांट को चलाने में प्रतिमाह 45 से 50 लाख रूपये की बिजली खर्च होगी। प्लांट परिसर में सौर ऊर्जा से बिजली तैयार कर इस प्लांट के विद्युत के खर्च कम करने की योजना बनाई जा रही है।
प्लांट निर्माण करने वाली एजेंसी अभी परिसर में जहां टीनशेड का स्ट्रक्चर बना हुआ है, उसकी छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली तैयार करेगी। इस तरह करीब मौजूदा विद्युत खपत की 21 प्रतिशत विद्युत सोलर से तैयार हो सकेगी। कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि ट्रेचिंग ग्राउंड के चारों ओर की परिधि में करीब 50 एकड़ का हिस्सा सोलर पैनल लगाने के लिए एजेंसी को दिया जा सकेगा। इस तरह भविष्य में प्लांट के संचालन में खर्च होने वाली विद्युत का उत्पादन यहां लगाए जाने वाले सोलर पावर प्लांट से होगा।
नागरिकों के सहयोग से बायोसीएनजी प्लांट का सपना हुआ साकार
शहर के नागरिक डोर टू डोर कचरा संग्रहण वाहन में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग देते है। लोगों के इस प्रयास का ही असर है कि ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचने वाले 99 फीसद गीले कचरे में किसी तरह सूखा कचरा नहीं होता है। यही वजह है ट्रेचिंग ग्राउंड पर गीले कचरे से गैस बनाने की प्रक्रिया में एजेंसी को आसानी हुई।
जीरो वेस्ट प्लांट: कचरे की हर चीज का उपयोग
बायो सीएनजी: गीले कचरे का इस्तेमाल कर बायो सीएनजी गैस तैयार की जाएगी।
बायो खाद: गीले कचरे से गैस बनने के बाद जो गाद बचेगी उससे प्रतिदन 100 टन खाद बनाई जाएगी। 1 प्रतिशत गीले कचरे में जो सूखा कचरा मिला हुआ आएगा। उसे 45 दिन तक गलाकर उसमें ईट, प्लास्टिक को अलग कर खाद के रुप में इस्तेमाल किया जाएगा
पानी से बनाएंगे तरल खाद: प्लांट में बायो सीएनजी व खाद तैयार होने के बाद जो पानी बचेगा उसे परिसर में ट्रीट कर पानी का पुन: उपयोग किया जाएगा। परिसर में 245 एमक्यू लीटर क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाएंगे। इसके माध्यम से प्लांट के 60 फीसद पानी का उपयोग गीले कचरे की कटाई कर स्लरी बनाने में इस्तेमाल होगा। इसके अलावा 40 प्रतिशत लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार होगा। इस तरह के पानी को ट्रेचिंग ग्राउंड पर लगाए गए पौधो व वृक्षों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा किसानों को मृदा की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए भी दिया जाएगा।

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