शहर के 296 निजी स्कूलों के 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा उठाना पड़ेगा। जिले के 1803 निजी स्कूलों ने नर्सरी से 8वीं के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। शिक्षा विभाग ने किसी भी स्कूल के आवेदन को अस्वीकृत नहीं किया। वहीं 296 स्कूलों का नवीनीकरण लंबित रखा गया।
नवीनीकरण की तारीख समाप्त होने के बाद इन स्कूलों की मान्यता खत्म हो गई। विभाग ने अब तक उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी, जिसके चलते स्कूल अभी भी चल रहे हैं। अब डीईओ ने आदेश निकाल दिया है कि जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हो गई है, उन स्कूलों के विद्यार्थियों को सरकारी स्कूल में भर्ती किया जाए।
विभाग जिम्मेदार, क्योंकि आवेदन चेक ही नहीं किए
निजी स्कूल के निरीक्षण का काम ब्लॉक निरीक्षण अधिकारी के पास होता है। उनकी रिपोर्ट के बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी स्कूलों को मान्यता देते हैं। ब्लॉक अधिकारी ने रिपोर्ट अप्रैल-मई में जमा कर दी थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने आवेदनों को चेक करने के बाद कुछ स्कूलों को मान्यता दी आैर कुछ को लंबित रखा। किसी भी स्कूल के आवेदन को अस्वीकृत नहीं किया। इस दौरान नवीनीकरण की तारीख निकल गई और स्कूल की मान्यता खत्म हो गई।
इस लापरवाही की कीमत अब अभिभावकों को चुकाना पड़ेगी
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों की मान्यता खत्म होने के बाद भी संचालक स्कूल चला रहे हैं। अभिभावक स्कूल फीस के साथ यूनिफॉर्म, काॅपी-किताब के लिए हजारों रुपए खर्च कर चुके हैं। बीच सत्र किसी और स्कूल में प्रवेश दिलाना एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हर स्कूल में औसत 400 से 500 बच्चे भी मानें तो एक लाख से ज्यादा बच्चों के सामने साल खराब होने का संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर बच्चे भी चिंतित हैं।
पास के सरकारी स्कूलों में बच्चों को एडमिशन दिलाएंगे
निजी स्कूलों की मान्यता को लेकर कोई निराकरण नहीं निकला है। संकुल प्रभारियों को आदेश दिए हैं कि जिन स्कूलों की मान्यता खत्म हुई है, उनके समीप के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों को ट्रांसफर करने के लिए चिह्नित करें। मान्यता खत्म होने के बाद भी जो प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी।
