महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल जी की जयंती को इस अवसर पर इंदौर में विशेष तरीके से मनाया जा रहा है… दोनों वीरों की प्रतिमा स्थल से कुछ 5 हजार साइक्लिस्ट्स, साइक्लिंग करते वीर शिवाजी की प्रतिमा स्थल तक पहुंचेंगे…कल्पना करें उस महान दृश्य की जिसमें 7 फ़िट 5 इंच के महाराणा… सीने पर 72 किलो का कवच… हाथ में 81 किलो का भाला… और हवा से बातें करता उनका चेतक… वो हल्दीघाटी का विशाल दर्रा… और वह अकल्पनीय छलाँग…!
सब कुछ, जैसे… ‘असंभव के विरुद्ध’ बस इसी चित्र को मन में लिए…’वीर चेतक’ की समाधि स्थल से लगातार साइक्लिंग करते हुए (एक दिन में)… इन्दौर तक छलाँग लगाने की ठानी है…
और हां…“अंग्रेजों ने तो सिर्फ़ हमें लूटा… किन्तु मुगलों ने तो हमारे धर्म को लूटा”…!इसीलिए ऐसे “महावीर महान महाराणा” को इस तरह याद करना… मेरा/ हमारा धर्म है…!
वन्दे मातरम्…
