
जिला जेल में बंद जालसाज पायल सैमुअल के पास मोबाइल मिलने के आठ दिन बाद भी दर्ज नहीं हुआ केस।
करोड़ों रुपयों की जालसाजी में इंदौर की जिला जेल में बंद पायल सैमुअल से मोबाइल जब्त होने के आठ दिन बाद भी जिम्मेदारों पर प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। जेल विभाग ने लिखित शिकायत कर पल्ला झाड़ लिया और पुलिस जांच प्रतिवेदन और सीसीटीवी फुटेज की राह देख रही है। हालांकि, एक प्रहरी को निलंबित कर दिया गया और सहायक जेल अधीक्षक को सिवनी जेल भेज दिया।
दिल्ली-मुंबई और भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में करोड़ों रुपयों की चपत लगा चुकी पायल से सहायक जेल अधीक्षक श्वेता मीणा ने 21 अगस्त को मोबाइल फोन बरामद किया था। जिला जेल अधीक्षक अजमेरसिंह ठाकुर ने मोबाइल की जब्ती बनाई और लिखित शिकायत के साथ संयोगितागंज थाने को सौंप दिया। आठ दिन बाद भी पुलिस ने न तो प्रतिबंधित वस्तु जेल में रखने पर केस दर्ज किया न किसी प्रकार की पूछताछ की। टीआइ तहजीब काजी के मुताबिक जेल विभाग से जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद कार्रवाई होगी। हालांकि, हमने जेल विभाग से सीसीटीवी फुटेज मांगे है। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि जेल में मोबाइल कैसे गया।
क्या सहायक अधीक्षक ने 50 हजार रुपये लेकर पहुंचाया मोबाइल – जेल अधीक्षक अजमेरसिंह ठाकुर ने प्रथम दृष्टया प्रहरी रुबिना को लापरवाह माना और निलंबित कर दिया। उससे पूछताछ की तो सहायक जेल अधीक्षक श्वेता मीणा का नाम बताया। यह भी कहा कि उसके पास तो पायल के पिता बीके सैमुअल ने पांच हजार रुपये का आन लाइन ट्रांजेक्शन किया था। श्वेता ने तो 50 हजार रुपये लिए थे। तरुण नामक और तनिष्का नामक युवती के जरिए रुपये भिजवाए थे। इसके बाद अफसरों ने पहले श्वेता को वार्ड प्रभारी से हटाया और बाद में उसे सिवनी जेल भेज दिया। इस मामले की सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर जांच कर रही है। डीआइजी मंशाराम पटेल भी पूछताछ कर चुके हैं।
कंबल में छुप कर बात करती थी, टीवी के पास मिला पावर बैंक – मामले में चार नंबर बैरक में बंद अन्य महिला कैदी भी संदेही हैं। मोबाइल रखने की बात उन्होंने छुपाई थी। धोखाधड़ी की आरोपित उर्वशी पर तो भाई शुभम के माध्यम से मोबाइल पहुंचाने का आरोप है। जेलकर्मियों ने टीवी के पीछे से मोबाइल चार्ज करने का पावर बैंक भी जब्त किया है। अब दोनों कैदियों की जेल ट्रांसफर करने के लिए पत्राचार किया गया है।