अधिवक्ता गौरव पांचाल ने बताया कि दिनांक 04.11.2021 को एक हत्या के मामले में आरोपी का भतीजा घर के पास वाले मैदान में अपने मित्रों के साथ खड़ा था कुद देर बाद आरोपी के भतीजा लहूलुहान अवस्था में घर आया और आवेदक को बताया कि कुछ युवकों ने उसे चाकू मारा है अधिक खून निकलता देख आरोपी अपने भी भतीजे को तत्काल पुलिस थाना विजयनगर ले गया जहां से पुलिस थाना विजयनगर के पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपी को उसके भतीजे का मेडिकल करवाने के लिए कहा। आरोपी अपने भतीजे को मेडिकल करवाने के लिए एम.वाय. हाॅस्पिटल लेकर गया और मेडिकल करवाकर पुनः विजयनगर थाने आया। रात अधिक होने तथा आरोपी तथा उसका भतीजे के घर नहीं लौटने पर घर के अन्य परिजन पुलिस थाना विजय नगर पहुंचे और वास्तविक घटना बताकर चाकू मारने वाले आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा आरोपी एवं उसके भतीजे को छोड़ने के लिए कहा क्योंकि चाकू लगने वाले भतीजे को खून निकल रहा और उसकी आयु 15 वर्ष थी परन्तु विजयनगर पुलिस थाने द्वारा आरोपी और उसके भतीजे को नही छोड़ा गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।
दिनांक 05.11.2021 को सुबह पुनः आरोपी के परिजन पुलिस थाना विजयनगर पहुंचे और थाना प्रभारी तहजीब काजी से बात की तो उन्होंने आरोपी और उसके परिजनों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज होने की बात कही। आरोपी के परिजनों द्वारा जब थाना प्रभारी तहजीब काजी को वास्तविक घटना बताई तो थाना प्रभारी तहजीब काजी ने आरोपी के परिजनों से अपराध से नाम हटाने के लिए पांच लाख रूपये की अवैधानिक मांग की और आरोपी व उसके भतीजे को जेल भेजने की धमकी देकर बोला गया कि ऐसा केस बनाउंगा कि सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत नहीं होगी। थाना प्रभारी तहजीब काजी के इस कृत्य की शिकायत आरोपी के परिजनों द्वारा इन्दौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सीएम हेल्पलाइन पर की। सर्वप्रथम आरोपी अपने भतीजे को लहुलुहान अवस्था में लेकर रिपोर्ट लिखवाने के लिए पुलिस थाना विजय नगर पहुंचा उसके पश्चात भी पुलिस थाना विजय नगर द्वारा फरियादी पक्ष से मिलीभगत कर पहले फरियादी पक्ष की रिपोर्ट लिखी तत्पश्चात आवेदक के भतीजे की ओर से एफआईआर पंजीबद्ध की गई।
आरोपी द्वारा अपने भतीजे को साथ लेकर आने की घटना तथा आरोपी को दिनांक 04.11.2021 से दिनांक 08.11.2021 तक अवैध रूप से हिरासत में रखने की घटना पुलिस थाना विजय नगर में लगे सी.सी.टी.वी. फुटेज में उपलब्ध है जिसकी मांग करते हुए आरोपी के जेल में निरूद्ध होने से उसके भाई द्वारा दिनांक 09.11.2021 को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आवेदन लोक सूचना अधिकारी/सीएसपी विजय नगर के समक्ष प्रस्तुत किया गया हैं। सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं करवाने पर सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने हेतु को प्रथम अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी/पुलिस अधीक्षक इन्दौर के समक्ष प्रस्तुत की गई परन्तु अपीलीय अधिकारी द्वारा भी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं करवाए गए। प्रथम अपील करने के पश्चात भी पुलिस थाना विजयनगर द्वारा सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं करवाने पर आवेदक के भाई द्वारा सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने हेतु द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग, भोपाल के समक्ष प्रस्तुत की गई परन्तु आज दिनांक तक राज्य सूचना आयोग भोपाल द्वारा भी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाने के संबंध में कोई दिशा-निर्देश अभियोगी को नहीं दिए गए हैं यह कि आरोपी की जमानत होने के पश्चात आरोपी द्वारा भी पुलिस थाना विजयनगर में लगे हुए सीसीटीवी कैमरों की दिनांक 04.11.2021 से दिनांक 08.11.2021 तक की सीसीटीवी फुटेज करने हेतु सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्रस्तुत किया परन्तु सीसीटीवी फुटेज की सी.डी./डी.वी.डी. आरोपी को उपलब्ध नहीं करवाई गई
तत्पश्चात आरोपी द्वारा अपने अधिवक्ता गौरव पांचाल के माध्यम से माननीय सत्र न्यायालय, इन्दौर के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया एवं अधिवक्ता ने माननीय न्यायालय को बताया कि आरोपी के विरूद्ध कोई प्रमाण एवं सबूत नहीं होने के पश्चात भी थाना प्रभारी तहजीब काजी द्वारा आरोपी को दिनांक 04.11.2021 की रात से दिनांक 08.11.2021 तक पुलिस थाना विजय नगर में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया तथा आरोपी के परिजनों से अवैध रूप से पांच लाख रूपयों की मांग की गई और तहजीब काजी की अवैधानिक मांग पूर्ण नहीं करने पर आरोपी को गंभीर धाराओं के झूठे अपराध में फंसा दिया गया। आरोपी को दिनांक 04.11.2021 से दिनांक 08.11.2021 तक अवैध रूप से हिरासत में रखने एवं असत्य एवं मनगढ़न्त आधारों पर आरोपी का नाम झूठे अपराध में सम्मिलित किए जाने का सम्पूर्ण घटनाक्रम पुलिस थाना विजय नगर में लगे सी.सी.टी.वी. वीडियों कैमरों में संग्रहित हैं। थाना प्रभारी तहजीब काजी द्वारा आवेदक के साथ किया गया उक्त कृत्य भादवि एवं पुलिस अधिनियम एवं विनियम के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता हैं पुलिस थाना विजय नगर के सी.सी.टी.वी. के कैमरों की वीडियों रिकार्डिंग की सी.डी. माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करवाने का आदेश अभियोगी को दिया जाना न्यायहित में अति आवष्यक हैं। यदि पुलिस थाना विजय नगर द्वारा सी.सी.टी.वी. कैमरों की वीडियों रिकार्डिंग नष्ट कर दी गई (जो कि अपराध में महत्वपूर्ण साक्ष्य है) तो आरोपी न्याय से वंचित हो जाएगा और उसे झूठे अपराध का सामना करना पडेगा जिसकी भरपाई एवं क्षतिपूर्ति करना भविष्य में असंभव होगा। आवेदक द्वारा यदि कोई अपराध कारित किया गया था तो अभियोगी द्वारा तत्काल गिरफ्तार कर संबंधित न्यायालय के समक्ष रिमांड ड्यूटी के दौरान प्रस्तुत करना था परन्तु आवेदक को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नही करते हुए दिनांक 04.11.2021 की रात से दिनांक 08.11.2021 तक अभियोगी द्वारा आवेदक को अवैध रूप से हिरासत में रख कर उसे टार्चर किया गया एवं कोरे दस्तावेज पर उसके हस्ताक्षर करवाए जो कि प्रथम दृष्टया विधि विरूद्ध है। घटना दिनांक 04.11.2021 के चार दिन पश्चात आरोपी के परिजनों द्वारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करने पर दिनांक 09.11.2021 को आवेदक को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया इसलिए आरोपी को पूर्ण विश्वास है कि पुलिस थाना विजय नगर के थाना प्रभारी तहजीब काजी द्वारा अपने उक्त अवैधानिक कृत्य को छिपाने के लिए पुलिस थाने के सी.सी.टी.वी. के कैमरों की वीडियों रिकार्डिंग जानबूझकर किसी ना किसी बहाने से नष्ट कर सकते हैं। पुलिस थाना विजयनगर द्वारा पुलिस थाना विजयनगर में आवेदक को अवैधानिक रूप से चार दिनों तक हिरासत में रखना के अनुच्छेद 21 भारत का संविधान के अंतर्गत आवेदक को प्राप्त प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा समय समय पर पारित निर्णयों में पुलिस थानों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने तथा न्यायालय में प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया हैं।
इस सभी तर्कों के आधार पर आरोपी अधिवक्ता द्वारा सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने हेतु कोर्ट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया जिस पर माननीय सत्र न्यायालय द्वारा आवेदन की प्रति भेजकर थाना प्रभारी विजयनगर से प्रतिवेदन आहूत किया गया परन्तु माननीय न्यायालय के आदेश के बावजूद भी थाना प्रभारी विजयनगर द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा अपने आदेश में उल्लेखित किया कि इस प्रकरण में आरोपी के आवेदन की प्रति थाना प्रभारी विजयनगर को भेजकर प्रतिवेदन आहूत किया गया था परन्तु थाना प्रभारी पुलिस थाना विजय नगर द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया ना ही सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता तथा अनुपलब्धता के के बारे में कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई जो संबंधित थाना प्रभारी की स्वेच्छाचारिता और न्यायालय आदेश का पालन न करने को स्पष्ट करता है। अतः पुलिस कमिश्नर इन्दौर को इस आदेश की प्रति भेजकर उन्हें इस संबंध में आवश्यक जांच कर संबंधित थाना प्रभारी के विरूद्ध आवश्यक विभागीय कार्यवाही करने का निर्देश दिए जाए।
