ओबीसी के घटेंगे तीन वार्ड, 85 में से आधे वार्ड महिलाओं के लिए भी आरक्षित होंगे, महापौर चुनाव को लेकर असमंजस ही

By Abhishek Raghuvanshi
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उत्‍तराखंड : निकाय चुनाव में होगी भाजपा सरकार की पहली परीक्षा - BJP  government first test will be in local body election in Uttarakhand

इंदौर। एक तरफ पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव (Panchayat and urban body elections) की हलचल बढ़ गई, तो दूसरी तरफ 25 मई को वार्ड आरक्षण रखा गया है। इंदौर निगम के कुल 85 वार्ड हैं, जिनमें से आधे वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे, तो इसके साथ ही एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के वार्डों का भी आरक्षण है। पिछले चुनाव में 21 ओबीसी वार्ड थे, जो अब घटकर 18 रह जाएंगे। वहीं 13 वार्ड एससी और 3 वार्ड एसटी के पहले से ही हैं। इस तरह कुल 34 वार्ड आरक्षित रहेंगे। नतीजतन कई दावेदारों के समीकरण बिगड़ जाएंगे, जो पिछले एक-डेढ़ साल से अपने-अपने चयनित वार्डों में मेहनत कर रहे थे। दूसरी तरफ महापौर के चुनाव को लेकर अभी भी असमंजस कायम है। दरअसल शासन में शामिल आधे लोग प्रत्यक्ष, तो आधे अप्रत्यक्ष चुनाव के पक्ष में हैं। फिलहाल तो पार्षदों के जरिए ही महापौर के चुने जाने का प्रावधान लागू है। अगर शासन अध्यादेश जारी नहीं करता तो पार्षद ही महापौर चुनेंगे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अचानक फैसले के चलते कांग्रेस और भाजपा में खलबली मच गई, क्योंकि एकाएक कोई भी चुनाव के मुंड में नहीं था। पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव दो सालों से टलते आ रहे थे और अब एकाएक सिर पर पड़ गए, जिसके चलते कांग्रेस और भाजपा रणनीति बनाने में जुटे हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत उन दावेदारों की है, जो पिछले एक-डेढ़ साल से अपने वार्डों में मेहनत-मशक्कत कर रहे थे, लेकिन अब आरक्षण के चलते उनका वार्ड प्रभावित हुआ तो उन्हें किसी अन्य वार्ड में जाना पड़ेगा और पुराने वार्ड में की गई फिल्डिंग धरी रह जाएगी। अग्निबाण की यह खबर भी सही साबित हुई कि ओबीसी वर्ग के वार्ड इंदौर में घटेंगे, क्योंकि पिछड़ा वर्ग आयोग ने 21 फीसदी आबादी को आरक्षण देने की मांग की है और सुप्रीम कोर्ट में भी यही रिपोर्ट लगाई है। इंदौर की आबादी में चूंकि 21 फीसदी पिछड़ा वर्ग की आबादी है, लिहाजा उस आधार पर 18 वार्ड आरक्षित होते हैं। हालांकि गत चुनाव में इस वर्ग को 21 वार्ड मिले थे। वहीं पहले से तय 16 वार्ड एससी-एसटी के खाते में जाएंगे। इस तरह 34 वार्ड आरक्षित होंगे और शेष 51 वार्ड सामान्य वर्ग के रहेंगे। हालांकि सभी 85 वार्डों में से आधे वार्ड यानी 50 फीसदी महिलाओं के लिए भी आरक्षित रखे जाना है। हालांकि यह आरक्षण सभी वर्गों के वार्डों में भी रहेगा। यानी 42-43 वार्ड तो महिलाओं के ही खाते में जाएंगे। 25 मई को वार्ड आरक्षण के बाद यह तस्वीर स्पष्ट होगी कि कौन से वार्ड ओबीसी वर्ग को मिले हैं और अगर उनमें सामान्य वर्ग के दावेदारों ने फिल्डिंग कर रखी होगी तो उन्हें अब ऐन वक्त पर नया वार्ड तलाशना पड़ेगा, जिसके चलते कुछ दावेदारों के राजनीतिक समीकरण गड़बड़़ा जाएंगे। दूसरी तरफ महापौर के चुनाव को लेकर भी असमंजस कायम है। शासन अध्यादेश लाकर इंदौर जैसे बड़े शहरों में जनता के जरिए ही महापौर का चुनाव करवाना चाहता है, मगर सत्ता से जुड़े आधे लोग इसकी बजाय पार्षदों के जरिए ही महापौर का चुनाव करवाने पर अड़े हैं। अब देखना यह है कि शासन अंतिम निर्णय क्या लेता है।

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