बात करते हैं इंदौर में हुए फर्जी डीडी कांड का बेंगलूर और झारखंड के शराब ठेकेदार महुआ टीवी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मोहन कुमार ने एमआई जी का ठेका लगभग ₹ 47 करोड़ में लिया था ठेके की 10 % शुरवाती लाइसेंस फीस की राशि 4 करोड़ 70 लाख रु ठेकेदार को आबकारी विभाग को शुरुआती लाइसेंस फीस के रूप में देना थे परंतु शराब ठेकेदार समूह महुआ टीवी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मोहन कुमार ने अपनी चतुरता का उदाहरण देते हुए चार लाख सत्तर हजार रुपए की एफडीआर को 4 करोड़ों 70 लाख की एफडीआर में परिवर्तित कर दिया क्योंकि एफडी बेंगलुरु के किसी बैंक की थी इसलिए इंदौर के आबकारी विभाग मैं पदस्थ अधिकारी को बेवकूफ बनाते हुए मोहन कुमार ने फोन पर ही उक्त एफडी को वेरीफाई करवा दिया फोन पर वेरीफाई होने के बाद एफडी की राशि का लाभ उक्त ठेकेदार को दिया परंतु ठेकेदार फर्म द्वारा पूरे घोटाले को अंजाम देने की नियत से यह कृत्य किया जिसके कारण मध्यप्रदेश शासन को लगभग 7 करोड़ रु के राजस्व का नुकसान हुआ इसके विपरित देखा जाए तो इंदौर के आबकारी विभाग द्वारा लगभग इस वित्तीय वर्ष के टेंडरो में ₹140 करोड़ के राजस्व का फायदा इंदौर के आबकारी विभाग का दिया गया है रही बात 7 करोड़ रु की रिकवरी की तो फरार ठेकदार पुलिस गिरफ्त में आते ही उससे इस राशि की भरपाई की जाएगी
इंदौर से आबकारी विभाग को मिला 140 करोड़ रु का अधिक राजस्व
इंदौर में वित्तीय वर्ष 2022 /23 के लिए शराब दुकानों के टेंडर आवंटित हुए जिसमे इंदौर के शराब की दुकानों के टेंडर की बेस प्राइज लगभग 1137 करोड़ रु था परंतु इंदौर के शराब दुकानों के टेंडरों में 1277 करोड़ की राशि प्राप्त हुई लगभग 140 करोड रुपए का फायदा इंदौर विभाग को मिला जबकि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के 33 ग्रुप के लिए 1059 करोड रुपए बेस प्राइज था परंतु उसके बाद भी भोपाल की पूरी दुकानो का आवंटन लगभग 702 करोड़ में करना पड़ा कुल मिलाकर लगभग भोपाल में पूर्व के वित्तीय वर्ष की बेस प्राइज राशि 780 करोड़ रु से भी कम व इस वर्ष की बेस प्राइज 1059 करोड़ से लगभग 357 करोड़ के नुकसान में सिर्फ 702 करोड़ में ही पूरे भोपाल के शराब दुकान के टेंडर आवंटित करना पड़े जबकि इंदौर में शराब दुकान के गत वर्ष से बेस प्राइज 1137 करोड़ की जगह लगभग 1277 करोड़ रु में इंदौर की शराब दुकानें आवंटित की गई जो की लगभग 140 करोड़ रु अधिक है जबकि भोपाल में 92 शराब दुकानों का वित्तीय वर्ष 2022 /23 के लिए बेस प्राइज लगभग 1057 करोड़ रु था जो की टेंडर में लगभग 702 करोड़ में आवंटित की गई कुल मिलाकर भोपाल की शराब दुकानों में ही सरकार को लगभग 357 करोड़ का नुकसान हुआ जबकि इसके विपरित इंदौर की शराब दुकानों में लगभग 140 करोड़ के राजस्व का फायदा हुआ
