रूस से निपटने की तैयारी:यूक्रेन में आम लोग नकली बंदूकों से कर रहे लड़ाई की प्रैक्टिस, सैनिक दे रहे ट्रेनिंग

By Abhishek Raghuvanshi
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रूस और यूक्रेन में सीजफायर के बाद भी तनाव बरकरार है। रूसी सेना जमीन के साथ साथ समुद्र में भी यूक्रेन की घेराबंदी कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर डिप्लोमैट्स की बातचीत डीरेल होती है तो यूक्रेन की पूर्वी बॉर्डर पर युद्ध शुरू हो सकता है। संभावित रूसी हमले के खतरे को देखते हुए यूक्रेन के आम लोगों ने भी कमर कस ली है। आम लोग अपनी मर्जी से सेना के साथ मिलकर नकली बंदूकों के जरिए किसी भी खतरे का सामना करने के लिए सैन्य अभ्यास कर रहे हैं।

रूस ने 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया छीन लिया था। इसके बाद प्रादेशिक रक्षा बल की स्थापना की गई थी। आम लोग इसी संगठन के जरिए सेना के साथ मिलकर प्रैक्टिस कर रहे हैं।
रूस यूक्रेन पर हमला करता है तब भी नाटो अपनी सेना नहीं भेजेगा। ब्रिटेन भी कुछ इसी तरह का बयान दे चुका है। इस वजह से यूक्रेन के आम लोगों की हिस्सेदारी और अहम हो जाती है।

लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए होर्डिंग्स लगाए गए
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन के कई शहरों में प्रादेशिक रक्षा बलों ने सैन्य अभ्यास में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए होर्डिंग्स लगाए हैं। इन होर्डिंग्स पर लिखा है, “जानिए कि आज अपने घर की रक्षा कैसे करें।”

प्रादेशिक रक्षा बलों की स्थापना देश 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जे के बाद की गई थी। इस अभ्यास में आम लोगों को हमले की छापामार तकनीक के साथ बन्दूक चलाने की मूल बातें बताई जा रही हैं।

यूक्रेन में बड़ों के साथ बच्चे भी प्रैक्टिस में हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि, बुधवार को पेरिस में 8 घंटे तक चली मीटिंग में रूस और यूक्रेन में सीजफायर हो गया था। इसके बाद भी तनाव बरकरार है।
यूक्रेन के लोगों में पुतिन की आक्रामक पॉलिसी को लेकर काफी ज्यादा गुस्सा है। कुछ लोगों को वो दौर अब भी याद है जब ये दोनों देश सोवियत संघ का हिस्सा थे।

कभी भाई भाई थे रूस और यूक्रेन
सेना के साथ मिलिट्री एक्सरसाइज में हिस्सा लेने वाले व्लास होन्चारुक कहते हैं कि पुतिन को उनकी आक्रामक सैन्य रणनीति के लिए धन्यवाद है, क्योंकि 1991 में सोवियत संघ से आजादी के बाद भी यूक्रेन की इतनी अलग और मजबूत पहचान नहीं थी, लेकिन अब एक सच्चे यूक्रेनी राष्ट्र का निर्माण किया जा रहा है।

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सेना के साथ अभ्यास करने वाले लोग अब भी उस दौर को याद करते हैं जब रूस और यूक्रेन दोनों भाई थे। हालांकि, अब हालात बदल चुके हैं। होन्चारुक का कहना है कि उन्होंने यह युद्ध क्यों शुरू किया? क्योंकि वे यूक्रेन को एक राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं। वे यूक्रेनियन और बेलारूसियों को रूसी तो मानते हैं, लेकिन दोयम दर्जे का रूसी।

2014 के मुकाबले अब हालात बिल्कुल अलग
रिटायर्ड यूक्रेनी जनरल व्लादिमीर हैवरिलोव का कहना है कि 2014 के मुकाबले अब हालात बिल्कुल अलग हैं। आज सेना की मदद करने के लिए लाखों नागरिक अच्छी तरह से प्रशिक्षित और तैयार हैं। वहीं, 55 साल के डिजिटल मार्केटर ओलेक्सी वासिलचेंको का कहना है कि पुतिन ने यूक्रेन और रूस के रिश्ते में जहर घोल दिया है।

रूस को रोकने के लिए यूक्रेन की सेना भी तैयार है। हालांकि, आम लोग इसलिए भी तैयारी कर रहे हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो वो भी अपने देश के काम आ सकेंगे। पश्चिमी देश भी यूक्रेन को हथियार भेजकर मदद कर रहे हैं।

नाटो सेना नहीं भेजेगा
बता दें कि आम लोगों की ये मिलिट्री एक्सरसाइज इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि अमेरिका और नाटो शायद ही उसकी रक्षा के लिए सेना भेजेंगे। नाटो के महासचिव जेंस स्टोलटेंबर्ग तो रविवार को कह चुके हैं कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला कर भी देता है, तो हमारी योजना सेना भेजने की नहीं है। अमेरिका ने अपने 8,500 सैनिकों को अलर्ट पर तो रखा है, लेकिन वो सैन्य कार्रवाई की वजह आर्थिक कार्रवाई का प्लान बना रहा है।

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