पेंशन घोटाले के मामले में कैलाश विजयवर्गीय की मुसीबत फिर बड़ी

By Abhishek Raghuvanshi
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कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय महासचिव - Dainik Bhaskar

भोपाल : मध्य प्रदेश का चर्चित पेंशन घोटाला बीजेपी का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रमुख के के मिश्रा द्वारा उठाया गया यह मामला न्यायालय के आदेश के बाद फिर तूल पकड़ रहा है।

के के मिश्रा द्वारा वर्ष 2005 में न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष यह शिकायत की गई थी के इंदौर नगर निगम के तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय तथा एमआईसी मेंबर रमेश मेंदोला, शंकर लालवानी, उमा शशि शर्मा, मुन्नालाल यादव, सूरज केरो, ललित पोरवाल, कल्याण देवांग, मधु वर्मा, उस्मान पटेल, मेघा खानविलकर, नीतीश व्यास सहित पूर्व इंदौर कलेक्टर संजय शुक्ल व नोडल अधिकारी वीके जैन करीब ₹35 करोड़ का संयुक्त रुप से घोटाला किया गया है। न्यायालय द्वारा श्री के के मिश्रा को यह निर्देशित किया गया था कि वह उपरोक्त सभी लोक सेवकों के विरुद्ध शासन से अभियोग स्वीकृति लेकर के आए तथा श्री मिश्रा द्वारा मध्य प्रदेश शासन को वर्ष 2006 में अभ्यावेदन प्रस्तुत कर स्वीकृति चाही गई थी परंतु मध्यप्रदेश शासन द्वारा उपरोक्त अभ्यावेदन के संबंध में कोई भी आदेश पारित नहीं किया गया था जिसके कारण प्रकरण विगत कई वर्षों से लंबित चल रहा था।

व्यथित होकर श्री मिश्रा को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी एवं अपने अधिवक्ता श्री विभोर खंडेलवाल एवं श्री जयेश गुरनानी के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत करनी पड़ी। उपरोक्त रिट याचिका में माननीय न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 23.09.2022 के माध्यम से यह निर्देशित किया कि श्री मिश्रा आदेश पारित होने के 2 सप्ताह के भीतर नया अभ्यावेदन मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत करें जिसे 3 माह के भीतर शासन द्वारा आदेश पारित कर निराकृत किया जाएगा। अब रोचक यह होगा के क्या मध्यप्रदेश शासन उपरोक्त नेताओ के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देता है अथवा उन्हें बचता हैं।

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