धर्मांतरण के घोर विरोधी थे सन्त रविदास- सबनानी

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर : भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत और समाज सुधारक संत रविदास महाराज का जन्म उत्सव पूरे प्रदेश में उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी कार्यालय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

धर्मांतरण के विरोधी थे संत रविदास।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और इंदौर संभाग के प्रभारी भगवानदास सबनानी ने कहा कि संत रविदास 15वीं एवं 16वी शताब्दी जो मूल्य स्थापित किये थे, उनका पालन हम आज भी कर रहे है। उन्होंने कभी अपने श्रम से समझौता नहीं किया। गंगा में स्नान करने का वाक्य ‘मन चंगा तो कठोती में गंगा’ का वाक्य दोहराते रहते हैं। संत रविदास ने धर्मांतरण के खिलाफ लम्बा संघर्ष किया। वह उसके घोर विरोधी थे। भारतीय जनता पार्टी संत रविदास, पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. अम्बेडकर के विचारों पर कार्य कर रही है और उन्हें आगे ले जा रही है। पूरे मध्यप्रदेश में 13 से 20 फरवरी तक संत रविदास जयंती सप्ताह मनाया जा रहा है।

सन्त की कोई जाति नहीं होती।

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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ भाजपा नेता सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि सन्त रविदास रामानंद भक्ति मार्ग श्रृंखला के अनुयायी थे। उन्होंने कहा कि संत की कोई जाति नहीं होती, उनके अनुयायी खुद को दबा, पिछड़ा, समझते थे, लेकिन उन्हांंने समाज में इस विचार को समाप्त करने के लिए अथक प्रयास किए। सन्त रविदास ने कहा था देवता चाहकर भी मनुष्य नहीं बन सकते पर मनुष्य अपने सद्कर्मों एवं आचरण से देवतातुल्य बन सकता है। प्रयागराज ऐसी धरती है, वहां जो जाता है, तर जाता है। चाहे रविदास हो, कबीर हो या फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। संत रविदास ने उस समय समस्त समुदाय को राम के रंग में रंग दिया था। संतों की वाणी हमें संवारती है और सद्कर्म की ओर प्रेरित करती है। 500 वर्षों पूर्व सन्त रविदास द्वारा स्थापित किए गए मूल्य हमें आज भी प्रेरणा देते हैं।

मंच संचालन अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने किया। स्वागत भाषण जगदीश चौहान ने दिया। आभार बलजीतसिंह चौहान ने माना।

कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सूरज कैरो, भाजपा नगर प्रभारी डॉ. तेजबहादूरसिंह चौहान, महामंत्री घनश्याम शेर, अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य प्रताप करोसिया, अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला प्रभारी डॉ. प्रभुलाल जाटव, शिव वर्मा, अमर पेंढारकर, जगदीश वर्मा, रजत बुराना आदि उपस्थित थे।

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