द कश्मीर फाइल्स फिल्म के रिलीज होने के बाद फिर एक बार कश्मीर में पंडित परिवार निशाने प, कश्मीर के दौरे पर 24 अप्रैल को जाएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

By Abhishek Raghuvanshi
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PM Narendra Modi concludes US visit, thanks Trump and Americans for  exceptional hospitality - The Economic Times

सन 1990 के बाद से जो कश्मीर की स्थित बिगड़ी वह कुछ समय पहले तक सुधरती हुई दिख रही थी। ..लेकिन द कश्मीर फाइल्स फिल्म के रिलीज होने के बाद फिर एक बार कश्मीर में पंडित परिवार निशाने पर आ गए हैं। जो पंडित 1990 के पलायन में भी कश्मीर छोड़कर नहीं गए अब वे आतंकवादियों के निशाने पर विशेष रूप से आ गए हैं। पंडितों को फिर एक बार कश्मीर में बने रहना या वापस जाकर बसना कठिन लगने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को कश्मीर के दौरे पर जाने वाले हैं। मोदी का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धारा 370 हटने के बाद से वे पहली बार घाटी में पहुंचेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कौल व जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रवींद्र रैना पीएम के दौरे की तैयारियों में जुट गए हैं।

मोदी के कश्मीर दौरे को लेकर सुरक्षा की व्यवस्थाएं कड़ी की जा रही है। सुरक्षा कड़ी करने के पीछे कारण पाकिस्तान से काम करने वाले वे आतंकी संगठन है जो पिछले कई सालों से मोदी को टारगेट करने में लगे हुए हैं। चूंकि कश्मीर में इन संगठनों का कुछ हस्तक्षेप बाकी है जिससे ये अपनी कोशिशे पूरी करने में लगेंगे। बताया जाता है कश्मीर दौरे पर मोदी कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। दौरे के दौरान मोदी दुबई व शारजाह की कंपनियों के कार्यों की समीक्षा भी करेंगे जो यहां विकास कार्य कर रही हैं। बात यदि कश्मीरी पंडितों की करें तो मोदी का यह दौरा पंडितों की वापसी के लिए भी अहम माना जा रहा है। हालांकि देखने में तो यह आ रहा है कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म के सुपर हिट होने के बाद कश्मीर में काम कर रहे कुछ आतंकी संगठन अब फिर एक बार 1990 की रियल लाइफ का रीमैक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे कारण वापसी करने वाले पंडितों को कश्मीर वापस आने से तो रोकना है ही, साथ ही बचे हुए पंडित परिवारों में भी दहशत फैलाना है। शोपियां में तीन पंडित परिवार रहते हैं लेकिन वर्तमान में ये खौफ में है और घर में छिपकर बैठे हैं जैसे 1990 के दशक में बैठते थे। इसके पीछे कारण हाल ही में चोटीगाम गांव में कश्मीरी पंडित बाल कृष्ण पर आतंकवादियों द्वारा हमला किया जाना है। इस हमले की जिम्मेदारी कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (केएफएफ) ने ली है। ऐसा ही नहीं बल्कि कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में पंडितों व गैर कश्मीरियों पर हमले एकाएक बढ़ गए हैं। बिहार से आने वाले मजदूर भी आतंकवादियों का निशाना बन रहे हैं। इसके पीछे आतंकवादियों का स्पष्ट इशारा है कि कश्मीर में बाहर के व्यक्तियों को वे बसने नहीं देंगे। हालांकि कश्मीर पुलिस व भारतीय फौज मिलकर इन आतंकवादियों के सफाएं में लगे हुए हैं। कई आतंकवादियों को पुलिस व सेना ने मिलकर मौत के घाट भी उतारा है लेकिन पाकिस्तान सरपरस्त कुछ आतंकवादी संगठन अभी भी अपनी कोशिश में लगे हुए हैं। कश्मीर के मुस्लिमों के लिए भी यह वक्त महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तो यहां पुलिस व सेना दोनों ही है जिससे वे आतंकवादियों से डरे बिना उनकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचा सकते हैं। वैसे आतंकवादियों के लिए अब 1990 जैसा समय दोहराना नामुमकिन ही है लेकिन यहां की जनता को तय करना होगा शांति कैसे कायम रहे।

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