दुखद किन्तु चिंतनीय ग्रामीण इलाकों में आए दिन अनूसूचित जाति वर्ग के दुल्हे की बारात दबंगो द्वारा रोक दी जाती हैं। मंदिर प्रवेश नहीं करने दिया जाता ।
ताजा मामला उज्जैन जिले के थाना भाट पचलाना क्षेत्र के ग्राम बरडिया का हैं। यहां पर कल अनुसूचित जाति के दुल्हे मेहरबान परमार (जो कि स्वयं आरक्षक हैं मध्य प्रदेश पुलिस में) को मंदिर प्रवेश नहीं करने दिया गया और ट्रैक्टर ट्रॉली से बारात का रास्ता रोक दिया था। और आज इसी परिवार के दुल्हे कैलाश परमार की बारात थी। परिजन को आशंका थी कि आज भी गांव के दबंग लोग बारात में विवाद करेगें । मंदिर प्रवेश नहीं करने देंगे। ऐसी आशंका के चलते परिजनों ने अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार से गुहार लगाई। परमार ने अपने पदाधिकारीयों के साथ उज्जैन पुलिस अधीक्षक सत्येन्द्र शुक्ल और एडीएम संतोष टैगोर से मुलाकात कर गांव की समस्या से अवगत कराया।
साथ ही परमार ने इस मामले में संघ नेताओं से भी मदद मांगी ताकि दलित दुल्हे को बिना किसी विवाद के मन्दिर प्रवेश कराया जा सके ।
शाम को बारात निकलने वाली थी । एसडीएम निधि सिंग एसडीओपी पुष्पा प्रजापति और थाना प्रभारी संजय वर्मा दलबल के साथ गांव में पंहुच चुके थे ।
बारात के पूर्व ही गांव के कट्टर पंथियों ने पुलिस प्रशासन से मंदिर प्रवेश को लेकर हुज्जत की । कहा कि हमारे गांव की परंपरा है किसी दलित को मन्दिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा ।
दलितों पर पथराव करने हेतू दबंगों ने अपने अपने घरों की छतों पर पत्थर इक्कठे कर लिए थे ।
गांव में वर्ग संघर्ष की स्थिति निर्मित हो गई थी । गांव के एक छोर पर दलित समाज और गांव के दूसरे छोर पर सवर्ण समाज बीच मे पुलिस थी ।
यह स्थिती देख बैंड बाजे वाले बारात छोड़ कर भाग गए
दुल्हे को मंदिर प्रवेश की बारी आई तो एसडीएम ने परमार से कहा कि हमारे पास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल नही है ।
इसलिए आप मंदिर प्रवेश की जिद छोड़ दिजिए । विवाद हुआ तो हम संभाल नही पायेंगे ।
आप समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो समाज को मंदिर के बजाय स्कूल और शिक्षा के लिए प्रेरित करो । भगवान तो सभी जगह है । मन्दिर जाकर क्या करोगे ?
परमार ने कहा यदि भगवान सभी जगह है तो मन्दिर क्यों बनाया गया ।
यह सुन एसडीएम तिलमिला उठी और कहा यहां की परंपरा को में नहीं तोड सकती । आप बाहर से ही दर्शन करो और जाओ ।
अंततोगत्वा दलित दुल्हे को मन्दिर प्रवेश नहीं दिया गया उसे बाहर से ही दर्शन कर अपने मन को समझाना पड़ा । और वहा पर मौजूद पुलिस प्रशासन नपुंसक की भाती मूकदर्शक बनकर खड़ा रहा ।
संघ नेताओं ने भी दबंगों को समझाने का काफी प्रयास किया किन्तु असफल रहे।
