जापान में फरवरी 2021 में मिनिस्ट्री ऑफ लोन्लीनेस यानी अकेलेपन को दूर करने के लिए मंत्रालय बनाया गया। इसका मकसद लोगों को डिप्रेशन से बाहर लाना, उन्हें अकेलेपन से मुक्त कराना और खुदकुशी करने से बचाना था।
दरअसल, कोरोना के दौरान जापान की एक बड़ी आबादी बेरोजगार हो गई थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण खाने और तेल समेत कई चीजों के दाम बढ़ गए थे। ऐसे समय पर लोगों ने खुद को समाज से काट लिया और वे अपने घरों में बंद हो गए। इन लोगों को वहां हिकिकोमोरी नाम दिया गया। इसी से निपटने के लिए लोन्लीनेस मिनिस्टर की नियुक्ति हुई।
सवा साल में बदले तीन मंत्री
मगर बीते सवा साल में इस विभाग का तीसरा मंत्री बदला गया है। मासानोबू ओगुरा को अगस्त में ही यह विभाग दिया गया है। इसके अलावा उनके पास घटती जन्म दर, लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, समाज में समावेशिता और बाल नीति जैसे विभाग भी हैं। जबकि जापान में अकेलेपन के कारण खुदकुशी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि यह विभाग ऐसे मंत्री को दिया जाए जो इस पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करे।
हर 24 में से एक घर में हिकिकोमोरी
2019 में जापान में 20,169 लोगों ने तो 2020 में 21,081 ने सुसाइड किया। 2021 में मंत्रालय बनने के बावजूद भी 21,007 लोगों ने खुदकुशी की। टोक्यो में औसत देखा जाए तो 24 में से हर एक घर ऐसा है, जहां हिकिकोमोरी है। इनमें 52% महिलाएं हैं।
महिलाओं में तेजी से बढ़ी खुदकुशी की दर
महामारी के कारण लोगों में खुदकुशी की दर बढ़ी है। कोरोना काल में लोग बिल्कुल भी सोशलाइज नहीं हो पाए। वे अपने दोस्तों से मिलना तो दूर, उन्हें देख भी नहीं पाए। कई लोग ऐसे थे जिन्होंने बेरोजगारी की मार झेली। महिलाओं को सबसे पहले नौकरी से निकाला गया। यहां महिलाओं को सेमी-स्किल्ड मानकर नौकरी पर रखा जाता है। जापान में 2020 में 6,976 महिलाओं ने सुसाइड किया, जो 2019 की तुलना में 15% ज्यादा है। 2021 में ये संख्या बढकर 7,068 हो गई।
