कुटुम्ब न्यायालय इंदौर का दिहाड़ी मजदूरी करने वाली पीड़ित पत्नियों के लिए महत्तपूर्ण फैसला

By Abhishek Raghuvanshi
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पीड़िता पत्नी पर झूठे चरित्र लांछन लगाकर खुद को बेरोजगार बताने वाले पति से कोर्ट ने दिलाये तीन लाख अस्सी हजार भरण पोषण की राशि
घरेलू हिंसा के कई मामले आए दिन देखने को मिलते है जिसके बाद पीड़ित महिलाएं न्याय की गुहार लगाते हुए दर दर भटकने के बाद एक उम्मीद लेकर न्यायालय की ओर बढ़ती है जहाँ वो अपने आप पर हुए अत्यचार का न्याय मांगती है, ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमे पीड़िता अपने पति से परेशान होकर कुटुम्ब न्यायालय पहोंची जहा पीड़िता की आवाज बनते अधिवक्ता प्रीति मेहना ने पीड़िता को उसका हक ओर न्याय दिलाया जिसमे
.कोर्ट द्वारा कहा गया दूसरी शादी करने की शंका का आरोप बगैर ठोस प्रमाण के दूसरी शादी का प्रमाण सिद्ध नही होता है
.यदि कोई महिला पेट पालने के लिए मजदूरी या छोटा मोटा व्यवसाय करती है तो उस आधार वह भरण पोषण पाने से वंचित नही होगी…*.पति द्धारा स्वयं को बेरोजगार बताने से वह पत्नी के भरण पोषण करने के दायित्व से मुक्त नही हो सकता हैं.

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