अपना दल का बुंदेलखंड और अवध की सीटों पर भी दावा, भाजपा से दो दर्जन सीटें मांगी

By Abhishek Raghuvanshi
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पिछड़ी जाति के वोट बैंक को समेटने को लेकर परेशान भाजपा पर सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी अपना दल (एस) ने भी दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने इस बार पूर्वांचल के अलावा अवध और बुंदेलखंड की भी करीब आधा दर्जन सीटों पर दावा करके भाजपा को पेशोपेश में डाल दिया है। इनमें से कई सीट अभी भाजपा के पास है।

उधर, भाजपा की उलझन ये है कि यदि वह इन सीटों को अनुप्रिया को देती है तो अपने विधायकों को कहां समायोजित करेगी। वहीं, एनडीए में शामिल जनता दल (यू), निषाद पार्टी और रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) भी सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा पर दबाव बनाए हुए हैं।

दरअसल चुनावी के कार्यक्रमों की घोषणा के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान समेत तमाम पिछड़ी जाति के नेताओं के पाला बदलने से भाजपा जहां पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को संभालने को लेकर परेशान है, वहीं भाजपा के सभी सहयोगी दल भी बदले हुए सियासी माहौल में जल्द-जल्द सीटों के बंटवारे के मुद्दे साफ कर लेना चाहते हैं। वहीं भाजपा भी सहयोगी दलों को सीट देकर मामले को जल्द खत्म करना चाहती है। पेंच सिर्फ सीटों की संख्या को लेकर फंसा है।

बता दें कि 2017 में भाजपा ने अपना दल (एस) को 11 सीट दिया था। इनमें अपना दल 9 सीटों पर चुनाव जीत पाई थी। इनमें सेवापुरी (वाराणसी), मडियाहूं (जौनपुर), छानबे (मिर्जापुर), दुद्धी (सोनभद्र), सोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर), जहानाबाद (फतेहपुर), प्रतापगढ़ सदर व विश्वनाथगंज (प्रतापगढ़) और सोरांव (प्रयागराज) शामिल हैं। जबकि प्रयागराज जिले की प्रतापपुर और हंडिया सीट पर पार्टी को हार हाथ लगी थी। लेकिन इस बार पार्टी ने दो दर्जन सीटों पर भाजपा हाईकमान के सामने दावेदारी पेश कर दी है।
अवध व बुंदेलखंड की इन सीटों पर अपना दल ने किया दावा
सूत्रों के मुताबिक 2017 में मिली सीटों के अलावा अपना दल ने अवध और बुंदेलखंड में कई सीटों पर दावा किया है। इनमें बांदा, महोबा, झांसी के अलावा कुशीनगर, बहराइच, अयोध्या, कानपुर, आजमगढ़ और बहराइच की कई सीटें शामिल हैं। इनमें से कुछ जिलों को छोड़कर सभी में पार्टी की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल सभा भी कर चुकी हैं।

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उधर, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद भी दो अंकों में सीट देने की मांग कर चुके हैं, साथ ही आरपीआई के अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले भी कम से कम 10 सीटों पर दावेदारी पेश कर चुके हैं। इसी प्रकार बिहार में भाजपा की सहयोगी जनता दल (यू) भी 3-4 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसे में सहयोगी दलों को सीटें देने को लेकर भाजपा पर दबाव बढ़ गया है।

अपना दल (एस) के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल का कहना है कि हर पार्टी अपना विस्तार चाहती है। हम भी पार्टी को विस्तार देकर अपना दायरा बढ़ाना चाहते हैं। जहां तक सीटों के बंटवारे का सवाल है तो हमने भाजपा हाईकमान के सामने अपनी मांग रख दी है।

निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का कहना है कि भाजपा के सामने हमने अपनी मांग रख दी है। हमें उम्मीद है कि दो अंकों में मुझे सीटें मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि एक-दो दिन में सीटों का बंटवारा हो जाएगा।

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