अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक ऐसी महिला से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं जिस महिला ने मानव सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया और पिछले 7 वर्षों से वह शहर में निराश्रित महिला पुरुष बच्चे सभी के लिए कार्य कर रही हैं इसके साथ ही कहीं लावारिस शव जिनका कोई नहीं था उनका अंतिम संस्कार कर, पिंडदान व तर्पण कर उन्हें मोक्ष का भागी बनाया, हम बात कर रहे हैं इंदौर की समाज सेविका भाग्यश्री खरखड़िया की।
मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानते हुए अपना धर्म निभा रही बेसहारा की उम्मीद इंदौर की समाज सेविका भाग्यश्री खरखड़िया। जो पिछले 7 वर्षों से समाज सेवा के कार्य में रहते हुए इंदौर शहर में लावारिस निराश्रित महिला पुरुष वह बच्चों के लिए कार्य कर रही है, साथ ही वह लोग जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं उनकी सेवा करना साथ ही
उनका इलाज करना,उन्हें आश्रय दिलवाना यह सारे कार्य उनके द्वारा किए जा रहे हैं इंदौर शहर में मिलने वाले लावारिस शव जिनका कोई ना हो उनका अंतिम संस्कार करना, हिंदू धर्म के अनुसार मुखाग्नि देना, पिंड दान करना और तर्पण करना यह सारे सेवा कार्य समाज सेविका भाग्यश्री द्वारा किए जा रहे हैं।
भाग्यश्री के द्वारा 108 लावारिस मृत व्यक्तियों की अस्थियों का पिंडदान तर्पण एवं गीता का पाठ करके उनके मोक्ष की कामना करते हुए उनका विसर्जन नर्मदा जी में किया गया, सबसे बड़ी बात यह है कि यह सारा कार्य वह स्वयं के खर्चे से करती है। भाग्यश्री को महिला होने पर गर्व है और मानव सेवा को वह नारायण सेवा मानते हुए अपना धर्म निभा रही है।
इंदौर शहर में पुलिस, नगर निगम ,अन्य व्यक्ति जब भी ऐसे किसी भी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जिसका कोई नहीं है तो वह स्वयं भाग्यश्री को खबर करते हैं और भाग्यश्री उनकी सेवा कार्य में जुट जाती है। मानव सेवा में जुटी भाग्यश्री खड़खड़िया आज सभी के लिए मानवता की बड़ी मिसाल है।
