- बंदी गोपाल करने लगा था अल्ताफ के आदेश का पालन, गोपाल को दिया जमानत कराने और मोटी रकम देने का झांसा और गोपाल भटक गया
- जेल में बंद बजरंगियों ने कि अल्ताफ कि सुताई, गोपाल को भी पड़े लपाडे
- ✍? जेलर पीके सिंह और सुभद्रा ठाकुर को खबर नही और जेल में चल रहा था मिशन धर्मान्तरण
वैसे तो जेल कि ऊँची ऊँची दीवारों से कोई बात बाहर आना मुश्किल है, लेकिन जिनके सूत्र मजबूत होते है उनसे कोई बात छुपना नामुमकिन हो जाता है। ऐसी हि एक चौका देने वाली बात मंदसौर जेल कि ऊँची दीवारें लाँघ कर लठैत_पत्रकार.कॉम के पास पहुँच गई। आपको याद होगा मिराज कम्पनी के डीलर धार्मिक प्रवर्ती के सज्जन पुरुष विष्णु बागोरा ने अपनी पत्नी और कथित जिम ट्रेनर अल्ताफ हुसैन से तंग आकर कुछ महिनों पहले आत्महत्या कर ली थी। इस आरोप में अल्ताफ और स्व विष्णु बागोरा कि पत्नी जेल कि रोटियां तोड़ रहे है। दरअसल अल्ताफ एक मिशन पर काम रहा है जिसमें गैर मुस्लिम पुरुष और महिलाओं का धर्मान्तरण कर उन्हें मुस्लिम बनाना मुख्य उद्देश्य है। इसीके चलते पहले अल्ताफ ने विष्णु बागोरा कि पत्नी जो उसके जिम में जाया करती थी उसे अपने झूठे प्रेमजाल में फंसाया और फिर इस लव जिहाद का अंत पूरे शहर ने देखा है। अल्ताफ ने और भी कई महिलाओं का जीवन बर्बाद करने कि कोशिश कि थी लेकिन बाकी मामले शिकायत के अभाव और इज्ज़त के डर से बाहर नहीं आ पाए। अब जानते है जेल काट रहा कट्टरपंथी अल्ताफ कैसे अपने मिशन को आज भी जेल में चला रहा था।
13 किताबें आई और गोपाल भटक गया
मंदसौर जेल में बंद कट्टरपंथी अल्ताफ के परिजन उसे 13 किताबें जेल में मुलाकात के दौरान दे गये ऐसा सूत्रों का दावा है। उन किताबों में हिन्दू धर्म के आराध्य देव श्रीराम को लेकर बहुत हि आपत्तीजनक बातें लिखी हुई थी। ऐसी हि किताबें अल्ताफ पढ़ता है और मिशन पर काम करता है। मंदसौर जेल में एक गोपाल नामक बंदी बंद है जो लंगडा चलता है, उसे अल्ताफ ने झब्बु दिया कि तेरी जमानत भी हम करा लेंगे और तुझे बहुत पैसा भी मिलेगा। साथ हि इस्लाम धर्म कि खूबियां और अन्य धर्मों विशेषकर हिन्दू धर्म कि खामियां गोपाल को बताई। गोपाल का ब्रेनवाश करने में अल्ताफ यहाँ भी वैसे हि कामयाब हुआ जैसे विष्णु बागोरा की पत्नी का ब्रेनवाश करने में सफल हुआ था। गोपाल हर उस बात का पालन करने लगा था जो अल्ताफ उसे समझता था। गोपाल ने जेल में बने मंदिर पर जाना तक बंद कर दिया था। गोपाल मुस्लिमो के समान व्यवहार करने लगा था। अल्ताफ अपने मिशन में सफल हो रहा था।
बजरंगियों को खबर मिलते हि अल्ताफ कि खैर खबर अच्छे से ले ली
विष्णु बागोरा के एक हँसते खेलते परिवार को बर्बाद करने वाला अल्ताफ गोपाल का भी धर्मान्तरण करने में सफल हो जाता लेकिन समय रहते इस कट्टरपंथी जिहादी अल्ताफ कि खबर जेल में बंद बजरंगियों को लग गई, फिर क्या था सभी ने घेर कर अल्ताफ को ऐसा सबक सिखाया कि शायद अब वो जेल में किसी और को धर्म विशेष का सबक नहीं सिखाएगा। ये बात कुछ दिनों पहले कि है जब अल्ताफ के मिशन को जेल में बंद कुछ समझदार बंदियों ने फैल कर दिया। इतना हि नहीं गोपाल के भी लपाडे पड़े और उसका दिमाग भी ठिकाने लगाया गया। इस बात कि जानकारी जेलर सहित स्टाफ और जेल बंद बंदियों सहित उनको भी है जो हाल हि में जेल से जमानत पर रिहा हुए है।
मुस्लिम बंदियों ने किया अल्ताफ का बहिष्कार
इस मामले में एक अच्छी बात ये भी सामने आई कि जेल में बंद मुस्लिम बंदियों को भी अल्ताफ का मिशन रास नहीं आया और उन्होंने अल्ताफ का बहिष्कार कर दिया क्योकि वो जो कर रहा था वो सब मानवता के विरुद्ध तो था हि इस्लाम के भी विरुद्ध था। क्योकि इस्लाम में साफ लिखा है कि किसी का भी जबरन बरगला कर धर्म परिवर्तन करना गुनाह है, लेकिन कुछ कट्टरपंथी ना जाने कौन से इस्लाम का पालन करते है और लोगों का धर्मान्तरण करवाते है। जेल में बंद मुस्लिम बंदियों ने अल्ताफ को रमजान में भी जेल कि मस्जिद में नहीं आने दिया ऐसा सूत्रों का दावा है और उससे बात करना भी बंद कर दी थी।
अधीक्षक साहब और मेडम नोट छापने में मस्त है
इस मामले के जेल से बाहर आने के बाद जेल अधीक्षक पीके सिंह और मेडम सुभद्रा ठाकुर पर सवाल खड़े होना लाजमी है, क्योकि जेल में कट्टरपंथी सोच को बडावा देने वाली किताबें आती है, धर्मान्तरण का खेल चलता है और जेल के जिम्मेदारो को तब पता चलता है जब अल्ताफ कि सुताई होती है। दरअसल जिम्मेदार तो जेल को नमकीन भंडार बना चुके है और घटिया सेव महंगे दामों में बेचने में व्यस्त है, बंदियों से बंदी लेने में व्यस्त है तो ऐसी गंभीर बातों पर उनका ध्यान कैसे जाता। खैर पूरा मामला एक बड़ी जाँच का विषय है
