सीवरेज ढक्कन के कारण हुई थी वकील की मौत, टाटा कंपनी के 10वीं पास सुपरवाइजर और इंजीनियर पर केस

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौरगेट क्षेत्र में सीवरेज ढक्कन के कारण अभिभाषक की बाइक डिवाइडर से टकरा गई थी। इससे उसकी मौत हो गई थी। मामले में महाकाल पुलिस ने छह माह जांच के बाद टाटा कंपनी के इंजीनियर व 10वीं कक्षा पास सुपरवाइजर के खिलाफ धारा 304 ए के तहत केस दर्ज किया है। एसआइ राजेंद्र जाधव ने बताया कि 23 वर्षीय अक्षत पुत्र उमेश शर्मा निवासी क्षीरसागर वकील था। 27 फरवरी को वह अपने दोस्त के जन्मदिन की पार्टी मनाने के लिए इंदौरगेट स्थित होटल गया था। रात करीब दो बजे अक्षत अपनी बुलेट एमपी 13 इवी 9460 से हरिफाटक ब्रिज से इंदौरगेट की तरफ आ रहा था। बुलेट सड़क पर उभरे हुए चैंबर से टकराने के बाद 50 फीट दूर तक गई। अक्षत उछलकर डिवाइडर से जा टकराया जिससे उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने टाटा कंपनी के हेड से गदा पुलिया से लेकर इंदौरगेट तक काम करने वालों की जानकारी मांगी तो पता चला कि सीवरेज लाइन पर चैंबर बनाने का काम सुपरवाइजर अनवर पुत्र रफीक निवासी चक कासल बरसाती जिला गुना हालमुकाम आरएन इन्फ्रा प्रा.लि. की देखरेख और इंजीनियर जुबैर पुत्र मंजूर एहमद निवासी रावतभाटा चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) हालमुकाम ग्रीन पार्क कालोनी की अनुशंसा पर हुआ है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 304 ए के तहत केस दर्ज किया है।
अमानक था चैंबर, सड़क से करीब तीन फीट ऊंचा था ढक्कन
बता दें कि स्मार्ट सिटी के सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत टाटा कंपनी द्वारा शहर में ड्रेनेज लाइन डाली जा रही है। शर्तों के अनुसार सड़क की खुदाई करने के बाद कंपनी को सड़क पूर्व की स्थिति में बनाकर देना थी। एसआइ जाधव के अनुसार इंदौरगेट पर जिस ढक्कन से अक्षत शर्मा की बुलेट टकराई थी उसकी जांच प्रायवेट इंजीनियर से कराई गई थी। इंजीनियर ने बताया कि चैंबर सड़क के लेवल से 65 मिमी (करीब 3 इंच से कुछ कम) बना हुआ है जो अमानक स्तर का है। इस तरह के चैंबर से टकराने से दुर्घटना की आशंका अधिक रहती है।
होटलों व मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे जांचे थे
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास स्थित होटल, दुकान व मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की थी। जिसमें पता चला था कि चैंबर से बुलेट के टकराने के कारण हादसा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने अधीक्षण यंत्री अमृत मिशन नगर निगम को पत्र लिखकर सीवर लाइन प्रोजेक्ट के ठेकेदार की जानकारी मांगी थी। अधीक्षण यंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उक्त काम टाटा प्रालि कंपनी द्वारा किया जा रहा है।

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