हाइकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने विधायकों और सांसदों की पेंशन को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। दरअसल,ये नोटिस जनहित याचिका की सुनवाई पर जारी किया गया है। अधिवक्ता अपुर्वा जैन ने दिसंबर 2020 में दायर जनहित याचिका के जरिए कहा था कि विधायकों और सांसदों को पेंशन की पात्रता के लिए कोई न्यूनतम कार्यकाल तय नहीं है। जो एक दिन के लिए भी सांसद या विधायक बन जाता है। उसे भी जीवन भर पेंशन दी जाती है। जबकि पेंशन केवल उन्हीं सांसद और विधायकों को दी जानी चाहिए जिन्होंने अपना पांच का कार्यकाल पूरा किया हो । लिहाजा,पेंशन की पात्रता के लिए न्यूनतम कार्यकाल तय होना चाहिए। क्योंकि सांसदों और विधायकों को जो पेंशन दी जाती है। वो कर दाताओं से लेकर दी जाती है। देश भर में चार हजार से ज्यादा सांसद ऐसे है, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया और पेंशन के पात्र बन चुके है। हाइकोर्ट की डबल बेंच ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य और केन्द्र सरकार को नोटिस भेजकर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
