स्मार्ट सिटी के स्मार्ट पते:दिल्ली के लुटियन्स जोन में हर भवन पर लगा यूनीक क्यूआर कोड, कूड़े वाली गाड़ी बिना रुके निकली तो तुरंत कंट्रोल रूम को मिलेगी सूचना

By Abhishek Raghuvanshi
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  • डिजिटल डोर नंबर प्लेट को स्कैन कर जानिए बकाया बिजली-पानी बिल, शिकायत भी इसी से

देश में स्मार्ट बनाने के लिए चुने गए 100 शहरों में से नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल यानी एनडीएमसी ने पहली बार स्मार्ट एड्रेसिंग का काम पूरा कर लिया है। राष्ट्रीय राजधानी में लुटियन्स जोन के नाम से ख्यात एनडीएमसी के दायरे वाले 50 हजार से अधिक मकानों को 9 डिजिट का यूनीक एल्फा-न्यूमेरिक कोड आवंटित किया गया है। इस कोड को एनडीएमसी डिजिटल डोर नंबर (एनडीडीएन) नाम दिया गया है।

एक छोटी सी स्टील प्लेट पर यह एनडीडीएन अंकित है जो एनडीएमसी के दायरे में आने वाले हर भवन के द्वार पर लगाई गई है। इस प्लेट पर बने क्यूआर कोड पर भवन का पूरा ब्योरा डिजिटल फॉर्म में दर्ज है। इस कोड को स्कैन कर न सिर्फ उस भवन का पानी, बिजली या गैस का बकाया बिल और बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पता लग सकता है, बल्कि इन सभी पेमेंट्स का पुराना रिकॉर्ड भी देखा जा सकता है।

बिजली, पानी, गैस व अन्य सुविधाओं से संबंधित शिकायतें भी इसी तंत्र से की जा सकती हैं। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में भी यह क्यूआर कोड क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा। जब कूड़ा एकत्र करने वाली गाड़ी दरवाजे के बाहर से होकर निकलेगी तो गाड़ी पर लगा स्कैनर 15 मीटर दायरे के एनडीडीएन को स्कैन करता जाएगा। यदि गाड़ी किसी मकान के बाहर बिना रुके निकल जाएगी तो कंट्रोल रूम को यह पता चल जाएगा कि गाड़ी ने फलां दरवाजे पर रुककर कूड़ा नहीं उठाया।

जल्द गूगल मैप पर इसी डेटा से मिलेगी लोकेशन
डीडीएन के 9 डिजिट को छोटा कर केवल 4 डिजिट का किया जा रहा है ताकि आसानी से याद हो सके। जल्द ही यह डेटा गूगल के साथ भी साझा होगा। आने वाले दिनों में डीडीएन से ही घरों को ढूंढने व रास्ता जानने में आसानी होगी। गूगल पर हर पते के अक्षांश, देशांतर के साथ इमारत की तस्वीर भी होगी ताकि पहचान में गलती न हो।

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तीन हिस्सों में बंटा है हर डीडीएन कोड
डीडीएन एक छोटी सी स्टील प्लेट है जिसे हर घर के दरवाजे पर लगाया गया है। इसके पहले तीन डिजिट अंग्रेजी के एल्फाबेट हैं जो उस इलाके के नाम का शॉर्ट फॉर्म है, इसके लिए समूचे नई दिल्ली इलाके को 48 छोटे प्रचलित व ऐतिहासिक हिस्सों में बांटकर 48 कोड तैयार किए गए हैं। अगले तीन अंक रोड नंबर हैं और आखिरी तीन अंक मकान नंबर है।

267 तरह की जानकारियों वाला डिजिटल मैप तैयार
इसी के साथ एनडीएमसी ने जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 267 स्तर के मैप तैयार किए हैं। एक ही डिजिटल मैप पर सारे पब्लिक टॉयलेट, स्कूल, पार्किंग स्पॉट, हॉस्पिटल, दफ्तर से लेकर सभी बिजली के खंभों, सीसीटीवी कैमराें तक की जानकारी दी गई है। इसमें खुले और अंडरग्राउंड नालों और अंडरग्राउंड इंटरनेट और बिजली के केबल के अलावा सीवर और गैस पाइपलाइन की भी जानकारी मौजूद है। यूजर चाहे तो अपनी जरूरत के हिसाब से जानकारी मैप पर देख सकता है। जल्द ही यह हर नागरिक के लिए उपलब्ध होगा।

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