अरावली में बने अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई एक दिन के लिए टाल दी गई। अब मंगलवार को इस केस की सुनवाई होगी। उधर नगर निगम प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा बता दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग द्वारा साैंपी गई अवैध फार्म हाउस की सूची के अनुसार 23 जुलाई से अब तक केवल 14 निर्माणों को ही तोड़ा गया है। इसके अलावा नगर निगम ने ये भी कहा है कि वन विभाग अरावली में बने अवैध निर्माण की लिस्ट उपलब्ध नहीं करवा रहा है। जिस कारण तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सूत्रों की मानें तो नगर निगम ने तीन बार वन विभाग को पत्र भेजकर अवैध निर्माण की लिस्ट उपलब्ध कराने को कहा है। लेकिन वन विभाग निगम को सूची नहीं दे रहा है।
130 से अधिक बने हैं अवैध निर्माण
बता दें कि अरावली वन क्षेत्र में करीब 500 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा है। इन कब्जों में 130 से अधिक अवैध फार्म हाउस, बैंकेट हॉल, गौशाला, आश्रम, शैक्षणिक संस्थान बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई के आदेश में वन विभाग व जिला प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। वन विभाग ने ड्रोन सर्वे भी करा लिया है। लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की है। हरियाणा सरकार ने 20 सितंबर की सुनवाई में 13 पेज का जवाब दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि अब तक कितने निर्माण तोड़े हैं और कितने निर्माण अभी बाकी है उनकी पूरी लिस्ट 27 सितंबर को पेश की जाए। लेकिन 27 सितंबर को निगम रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया अब 4 अक्टूबर को नगर निगम ने 18 पेज की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी है।
सरकार अपना रही लचीला रुख
सूत्रोंं की मानें तो पिछले दिनों सरकार की हाईलेवल बैठक हुई थी जिसमें अरावली में बने अवैध निर्माण को लेकर सरकार का लचीला रुख सामने आया। सूत्रों की मानें तो सरकार अब ये पता लगा रही है कि किन किन निर्माण को पीएलपीएल एक्ट के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि सरकार पीएलपीए संशोधित बिल लाकर कुछ निर्माण को तोड़फोड़ के दायरे से बाहर रखना चाहती है।
अवैध निर्माणों की सूची जल्द सौंपने का आश्वासन
जिला वन अधिकारी राजकुमार का कहना है कि उन्होंने अरावली वन क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूरा करा लिया है। वन विभाग जल्द ही अवैध निर्माणों की सूची नगर निगम को सौंप देगा। उन्होंने माना कि लिस्ट सौंपने में वन विभाग की ओर से देरी हुई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के बारे में जानकारी होने से इंकार किया।
