सीएसई रिपोर्ट:स्मॉग केवल दिल्ली-एनसीआर में ही नहीं, गंगा के मैदानों तक फैल चुका; 56 शहरों में वाहन-औद्योगिक प्रदूषण व पराली जलाने से खराब हाल

By Abhishek Raghuvanshi
3 Min Read

स्मॉग दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि समूचे उत्तर भारत की समस्या बनती जा रही है। सर्दियों के साथ ही उत्तर भारत के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर दिल्ली के बराबर या अधिक हो जाता है। नवंबर से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में धुंध छाने लगती है, जो अन्य इलाकों में तो आने वाले महीनों में छंटती जाती है लेकिन दिल्ली-एनसीआर व उत्तर प्रदेश के शहरों में फरवरी तक बनी रहती है।

इन क्षेत्र में खेतों में फसलों के जलाने, वाहनों के प्रदूषण, निर्माण व औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थिति खराब हो रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (सीएसई) के ताजा विश्लेषण में 56 शहरों में 137 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों को शामिल किया है। सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रायचौधरी का कहना है कि उत्तर भारत की स्थिति देश के बाकी हिस्सों से अलग है।

ये एक लैंड-लॉक्ड क्षेत्र है, जहां एक तरफ हिमालय पहाड़ है, तो दूसरी ओर हजारों किलोमीटर तक मैदान हैं। सर्दियों में हवा की मिक्सिंग हाइट काफी नीचे आ जाती है और हवा की गति बहुत धीमी हो जाती है। इस वजह से क्षेत्र में पैदा हो रहा प्रदूषण छंटने की बजाय लंबे समय तक स्थिर बना रहता है। अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली, एनसीआर और उत्तर प्रदेश में प्रदूषण स्रोत अधिक हैं।

सीएसई के प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी कहते हैं, कि सर्दियों में तापमान कम होने पर शांत मौसम, हवा की दिशा व समूचे परिवेश में परिवर्तन से विपरीत वायुमंडलीय स्थिति बनती है, प्रदूषण फैलता है और स्थिर बना रहता है, जिससे उत्तर भारत में घनी धुंध छाई रहती है। नवंबर के दौरान खेत की पराली की आग व दिवाली के पटाखों से निकलने वाले धुएं से हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है।

- Advertisement -

पंजाब, हरियाणा में धीरे-धीरे वायु गुणवत्ता में सुधार आने से वह गंभीर से खराब व मध्यम श्रेणी तक आ जाता है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर व यूपी में फरवरी तक हवा बहुत खराब श्रेणी में रहती है। राजस्थान में सर्दियों की शुरुआत में कुछ असर दिखता है लेकिन बाद में कम प्रदूषण रहता है।

सर्दी के महीने बीतने के बाद वायु प्रदूषण के स्तर में आती है कमी

Exit mobile version