विगत कई वर्षों के प्रयासों से इंदौर के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जफर अंसारी ने महारानी लक्ष्मीबाई साहिबा ऑफ झांसी का मूल वास्तविक चित्र ढूंढ निकाला जो 19वीं शताब्दी के मध्य एक तेल चित्र के रूप में बनाया गया था । चित्र में झांसी की रानी की उम्र 19 बरस की है हाथ में तलवार,पीठ पर ढाल,कमर पर कपड़ा,गले में मोतियों का हार, पैरों में पायजेब,सर पर बुंदेलखंडी पगड़ी दिखाई पड़ती है तेल चित्र में लक्ष्मी बाई साहिबा को तलवारबाजी एवं घुड़सवारी में निपुण एक योद्धा के रूप में दिखाया गया है। श्री अंसारी बताते हैं की कैप्टन डूरंड और रबर्ट हैमिल्टन के मूल पत्रों के साथ यह चित्र के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ था ।यह दोनों अंग्रेज 1857 के गदर के साक्षी रहे हैं साथ ही यह अंग्रेज अफसर ग्वालियर में झांसी की विजय पर रखे गए भोज मैं इंदौर रेसिडेंसी की ओर से सम्मिलित हुए थे तब रॉबर्ट हैमिल्टन इंदौर के रेजिडेंट थे और सेंट्रल इंडिया, बुंदेलखंड एजेंसी का काम देखा करते थे। गौरतलब है की बाद में झांसी रियासत को ग्वालियर स्टेट को दे दिया गया था।
श्री अंसारी बताते हैं की पेंटिंग का चित्र किसी रिकॉर्ड के लिए लिया गया था जो अब उनके व्यक्तिगत म्यूजियम में महफूज है चित्र में झांसी की रानी अपने प्रिय घोड़े के ऊपर सवार हैं क्योंकि चित्र का मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए इसे क्रॉप किया गया है जो आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। शीघ्र ही इसका मूल पूरा चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से जनता को दिखाया जाएगा।
लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में 19 नवम्बर 1828 को हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका तांबे था उनकी माँ भागीरथीबाई और पिता का नाम मोरोपंत तांबे था। मोरोपंत एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे। उल्लेखनीय है कि बाजीराव पेशवा की सेवा में रहे कई तांबे परिवार इंदौर में भी निवास करते थे जो रानी लक्ष्मीबाई के रिश्तेदार थे उनमें से एक महाराजा तुकोजी राव के शिक्षक थे,14 वर्ष की आयु में सन 1842 में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं,1853 में इनके प्रति का देहांत हुआ था। गौरतलब है कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जन्म को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं।
झांसी की लक्ष्मीबाई साहिबा इंदौर की भीमाबाई होलकर के चरित्र से अत्याधिक प्रभावित थी। 17 सितंबर 1795 में इंदौर( महलवाडा) राजवाड़ा में जन्मी भीमा बाई होलकर महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम की पुत्री थी, जिन्होंने सर्वप्रथम ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सिर्फ 22 वर्ष की आयु में कई छापामार युद्ध का नेतृत्व किया था । 21 दिसंबर 1817 में बैटल ऑफ महिदपुर में भीमाबाई होलकर ने ब्रितानिया हुकूमत से लोहा लिया था उनके पति गोविंदराव बोलियां सरकार की छतरी आज भी इंदौर के मध्य में स्थित है।
जॉन लैंग नाम के एक ऑस्ट्रेलियन पत्रकार थे, जो रानी लक्ष्मीबाई के वकील भी थे, वे ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ, रानी लक्ष्मीबाई की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे. ये कानून लड़ाई झांसी रियासत को ईस्ट इंडिया कंपनी से बचाने की थी।
जॉन लैंग की छोटी सी मुलाकात रानी लक्ष्मी बाई से हुई सन 1854 में हुई थी। जॉन लैंग की किताब ‘वंडरिंग्स इन इंडिया’ इस किताब में रानी लक्ष्मीबाई के बारे में लिखा है ”महारानी प्रभावशाली महिला थीं. औसत कद-काठी की थीं. शरीर स्वस्थ, ज्यादा मोटी नहीं. कम उम्र की सुंदर गोल चेहरे वाली महिला थीं. खासतौर पर आंखें सुंदर थीं और नाक की बनावट बहुत नाजुक थी. रंग बहुत गोरा नहीं, पर सांवले से दूर था. शरीर पर आभूषण के नाम पर मात्र कानों में बालियां थी।
रानी लक्ष्मीबाई शामियाने के एक कोने में एक पर्दे के पीछे बैठी हुई थीं. तभी अचानक रानी के दत्तक पुत्र दामोदर ने वो पर्दा हटा दिया.लैंग की नज़र रानी के ऊपर गई। बाद में रेनर जेरॉस्च ने एक किताब लिखी, ‘द रानी ऑफ़ झाँसी, रेबेल अगेंस्ट विल ।
किताब में रेनर जेरॉस्च ने जॉन लैंग को कहते हुए बताया, ‘रानी मध्यम कद की तगड़ी महिला थीं. अपनी युवावस्था में उनका चेहरा बहुत सुंदर रहा होगा, लेकिन अब भी उनके चेहरे का आकर्षण कम नहीं था. मुझे एक चीज़ थोड़ी अच्छी नहीं लगी, उनका चेहरा ज़रूरत से ज़्यादा गोल था. हाँ उनकी आँखें बहुत सुंदर थीं और नाक भी काफ़ी नाज़ुक थी. उनका रंग बहुत गोरा नहीं था. उन्होंने एक भी ज़ेवर नहीं पहन रखा था, सिवाए सोने की बालियों के,जो चीज़ उनके व्यक्तित्व को थोड़ा बिगाड़ती थी- वो थी उनकी फटी हुई आवाज़ । इन दोनों पुस्तक के आधार पर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई साहिबा के चेहरे का चित्रण इस तस्वीर को और भी प्रमाणिक करता ह।उल्लेखनीय है कि आज भी महारानी लक्ष्मीबाई साहिबा के वंशज इंदौर में रहते हैं और अपने आप को ‘झाँसीवाले’ कहते हैं.” चित्र एवं जानकारी जफर अंसारी म्यूजियम ऑफ इंदौर
