आज वो समय आ गया है जब पैसा आदमी से जो चाहा रहा है वो करवा रहा है| पैसों के पीछे पागल लोग न तो अपना ईमान देख रहे हैं और न ही किसी की जिंदगी| सचमुच मानवता पर पैसे का खेल भारी पड़ रहा है| पैसों के चक्कर में मानवता कुचली जा रही है जिसके बेहद घातक परिणाम देखने को मिल रहे हैं| यह सब हम आपसे इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक ऐसा ही मामले सामने आया है और इसने अंदर तक दहला कर झकझोर कर रख दिया है|
दरअसल, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अमानवीयता का वो चेहरा दिखा है जिसने एक बच्ची की जान ले ली है| यहां के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 3 साल की बच्ची का ऑपरेशन तो किया गया लेकिन ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया को अंजाम नहीं दिया गया| जिसकी वजह बना पैसा| हुआ ये कि बच्ची के परिवार ने ऑपरेशन के पैसे तो दिए लेकिन उतने नहीं दे पाया जितनी कि अस्पताल ने डिमांड की थी| जिसके चलते अस्पताल ने न आव देखा और न ताव सीधा बच्ची को ऑपरेशन की अधूरी प्रक्रिया के साथ अस्पताल से बाहर कर दिया| अस्पताल ने जब परिवार को बच्ची को सौंपा तो उसका पेट का जो ओपरेशन किया गया था उसके बाद टाँके नहीं लगाए गए थे और बच्ची को फ़टे पेट के साथ परिवार को थमा दिया गया| वहीँ, इलाज के अभाव में बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के करेली इलाके की रहने वाली इस तीन साल की बच्ची को पेट में प्रॉब्लम थी। जहां परिवार ने इलाज के लिए प्रयागराज के धूमनगंज के रावतपुर एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया। इसके ऑपरेशन के बाद एक ऑपरेशन और हुआ। बच्ची के पिता के मुताबिक इस ऑपरेशन का डेढ़ लाख रुपए ले लेने के बाद भी हॉस्पिटल प्रशासन ने पांच लाख की डिमांड की। जिसकी व्यवस्था करने की उसने पूरी कोशिश की मगर इलाज के लिए पूरी रकम दे पाने में उसके हाथ असमर्थता लगी| वह खेती बेचकर भी इतने पैसे नहीं जुटा पाया| वहीँ, जब वह अस्पताल के द्वारा मांगे गए पैसे की मांग पूरी न कर पाया तो हॉस्पिटल प्रशासन ने बच्ची को उसे थमा दिया और कहा कि अब इसका इलाज यहां नहीं हो पाएगा। बच्ची की हालत बहुत बुरी थी| उसका पेट फटा हुआ था| पैसे न मिलने पर ऑपरेशन के बाद अस्पताल ने बच्ची के पेट को नहीं सिला और कहा कि ले जाओ|
और हॉस्पिटल्स में लेकर भागे….
बच्ची के पिता का कहना है कि जब इस हॉस्पिटल ने हमें निकाल दिया और बच्ची की हालत ऐसी थी तो हम उसे मरने के लिए थोड़ी न छोड़ सकते थे| हम बेटी को लेकर कई हॉस्पिटल तक गए। लेकिन सभी हॉस्पिटलों में बच्ची को लेने से मना कर दिया गया। कहा गया कि बच्ची की हालत बहुत क्रिटिकल है, वह नहीं बच पाएगी। और आखिरकार वही हुआ, बच्ची जिंदगी की जंग हार गई और उसने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया।
डीएम ने दिए मामले की जांच के आदेश….
इधर, घटना को गंभीरता से देखते हुए प्रयागराज के जिलाअधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए एक जांच टीम बना दी है|
