गुजरात में वडोदरा के पास दरोली गांव हैं जहां इन दिनों सात किलो वजन का एक पत्थर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस पत्थर की विशेषता यह है कि यह पानी में भी तैरता है। लोग इसे रामसेतु से निकला पत्थर मानकर इसकी पूजा कर रहे हैं। पूजा करने के साथ इस पत्थर को रोज परीक्षा भी देनी पड़ रही है जब लोग इसे पानी में डालकर देखते हैं।
हुआ यह कि एक मछुवारा जब नर्मदा नदी में मछली पकड़ने गया तो उसे तैरती हुई अजीब सी चीज दिखी। उसने पहले तो उसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन काम निपटा तो उसने घर वापसी से पहले इसे देखने की बात सोची। जब पास गया तो उसने देखा यह तो पत्थर है। जब बाहर निकाला तो उसका वजन ज्यादा होने से युवक को आश्चर्य भी हुआ। वह पत्थर को गांव ले आया। लोगों ने अपने-अपने तरीके से इस पत्थर की परीक्षा ली। किसी ने नदी में तो किसी ने कुएं में डाला। कुछ लोगों ने तो घर में बाल्टी में पानी भरकर भी इसकी तैराकी के गुण परखे। यह देखने में आया कि अधिकांश व्यक्ति इस पत्थर के तैरने को लेकर अपनी सारी शंका मिटा लेता तब वह हाथ जोड़कर अपने लिए कुछ मांगता। वह इसे रामसेतु से निकला पत्थर ही मान रहा है। उधर, एमएस यूनिवर्सिटी से रिटायर हुए प्रोफेसर के.सी. तिवारी का कहना है कि कुछ खास प्रकार के पत्थरों का तैरना आम बात है। कुछ कोरेल्स स्टोन, चूने के पत्थर या फिर ज्वालामुखी के मलबे से निकले पत्थर वजनी तो होते हैं लेकिन उनमें जो डेंसिटी होती है वो कम होने के चलते ही पानी में हलके रहते हैं। इस वजह से और उनमें छेद होने के चलते छेदों में हवा भरी होने की वजह से ये पत्थर पानी में तैरते हैं।
