आनलाइन समाधान पर फर्जी दस्तावेज बनाने का काम चल रहा है। बाणगंगा थाना पुलिस ने मूसाखेड़ी के देवीलाल को हिरासत में लिया था। देवीलाल के मोबाइल में वाट्सएप चेटिंग देखी तो उससे पता चला कि वह कलेक्टोरेट में दलाली का काम करता है और लोक सेवा केन्द्रों से जुड़ा हुआ है। जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी फर्जी तरीके से कुछ दिन में ही बना कर दे दिया जाता था। देवीलाल की वाट्सएप चेटिंग के आधार पर लोक सेवा केन्द्रों में काम करने वाले तीन आरोपितों को हिरासत में लिया है। इनमें वर्षा मिश्रा परदेशीपुरा लोक सेवा केन्द्र पर काम करती है। दूसरा रोहित चौधरी पालिका प्लाजा और आकाश जो कलेक्टर कार्यालय में लोक सेवा केन्द्र में काम करने वालों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया है।
इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने के मामले के नए नए खुलासे सामने आ रहे है…बाणगंगा थाना टीआइ राजेन्द्र सोनी ने बताया कि पुलिस ने तीन दिन पहले शांतिनगर में चल रहे प्रियांशी आनलाइन सेंटर पकड़ा था। यहां पर फर्जी आयुष्मान, वोटर आइडी कार्ड, आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेज बनाए जाते थे। यहां से प्रदीप और अजय को गिरफ्तार किया था। प्रदीप को जेल भेज दिया था और अजय मंगलवार तक रिमांड पर है। आरोपितों को जब गिरफ्तार किया था तो पता चला था कि उन्होंने पोर्टल प्रिंट डाट एक्सवायजेड की पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति से 4500 रुपये में फ्रेंचाइजी ली थी, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा सकते थे।क्यूआर कोड जनरेट करने के साथ ही एडीटिंग भी हो जाती थी। फ्रेंचाइजी देने वाले को जब पता चला तो उसने पूरा डेटा डिलीट कर दिया है। हालांकि पुलिस ने एप की फ्रेंचाइजी देने वाले की भी तलाश की लेकिन वह अभी पकड़ में नहीं आया है। आरोपितों से यह भी पता चला है कि उन्होंने हजारों में आयुष्मान कार्ड फर्जी तरीके से बनाए हैं। आयुष्मान कार्ड के अधिकारियों को भी पुलिस ने सूचना दी है, लेकिन अभी उनसे बात नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि इसमें कई और आरोपितों के नाम सामने आ सकते हैं।जांच में रोहित चौधरी पालिका प्लाजा और आकाश जो कलेक्टर कार्यालय में लोक सेवा केन्द्र में काम करने वालों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया है।
