द न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत:छोटे-छोटे रिवॉर्ड लोगों को वर्कआउट के लिए प्रेरित करने में कारगर, इनसे साप्ताहिक जिम विजिट में 27% बढ़ोतरी देखने को मिली

By Abhishek Raghuvanshi
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लोगों को रिवॉर्ड मिलें तो वर्कआउट करने के लिए ज्यादा प्रेरित होते हैं। अगर यह रिवॉर्ड पैसे से जुड़ा तो और भी ज्यादा प्रभावी रहता है। यह उन लोगों पर भी असरकारी है, जिन्होंने वर्कआउट रेजिम बीच में छोड़ दिया हो। यह दावा अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले 30 वरिष्ठ वैज्ञानिकों की मेगास्टडी में किया गया है। विशेषज्ञों ने इनके लिए 54 फिटनेस प्रोग्राम डिजाइन किए थे। यह स्टडी नेचर मैगजीन में प्रकाशित हुई है। दरअसल विशेषज्ञों के सामने लंबे समय से यह चुनौती है कि लोगों को वर्कआउट के लिए कैसे प्रेरित किया जाए।

महामारी के बाद यह समस्या और बढ़ गई। इसका हल ढूंढ़ने के लिए 61293 अमेरिकियों के साथ बड़े पैमाने पर स्टडी की गई। इसमें प्रतिभागियों को टैक्स्ट मैसेज, ईमेल से अलर्ट, जिम में उपयोग के लिए मुफ्त ऑडियोबुक, पैकेज के अलावा अतिरिक्त दिनों की जिम विजिट जैसै प्रलोभन दिए गए थे। ‘स्टेप अप’ प्रोग्राम के तहत इन 61 हजार प्रतिभागियों को वैज्ञानिकों ने 53 समूहों में बांटा था।

व्हार्टन स्कूल की मानव व्यवहार विज्ञान विशेषज्ञ केटी मिल्कमैन बताती हैं कि अभी तक हुई स्टडीज में यह नहीं पता चल पाया था कि कौन से उपाय ज्यादा कारगर होंगे। छूटे हुए वर्कआउट रेजिम में लौटने के लिए प्रतिभागियों को 22 सेंट (16 रुपए) के रिवॉर्ड पॉइंट्स दिए गए तो जिम विजिट 0.4% बढ़ गई और वर्कआउट में 27% की बढ़ोतरी देखने को मिली। हफ्ते के दौरान ज्यादा विजिट पर कुछ समूहों का इंसेंटिव बढ़ाकर 1.75 डॉलर किया तो उनकी उपस्थिति 0.37% तक बढ़ी, वहीं वर्कआउट में 25% का इजाफा हुआ। यानी नतीजे उत्साहजनक रहे।

वैज्ञानिकों के विभिन्न प्रोग्राम्स से साप्ताहिक जिम विजिट में 9% से 27% वृद्धि हुई। सबसे ज्यादा असरकारी माइक्रो-रिवॉर्ड्स रहे, जिन्होंने लोगों को जिम दोबारा लौटने के लिए प्रेरित किया। वैज्ञानिकों का दावा है कि व्यवहार विज्ञान के इस पहलू में शारीरिक व आर्थिक सेहत में सुधार की अद्भुत क्षमता है। हालांकि ये कोई नया तरीका नहीं है, पर हर बार कारगर रहा है।

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फोन में ट्रेनर या जिम बडी के साथ रिमाइंडर सेट करें ताकि रुटीन बना रहे

व्हार्टन स्कूल की प्रोफेसर एंगेला डकवर्थ बताती हैं, इस स्टडी के निष्कर्ष हमें इनसाइट देते हैं कि हम आने वाले साल में कैसे अपने वर्कआउट रेजोल्यूशन को मजबूत रख सकते हैं। इसके अलावा नए साल में वाजिब वर्कआउट प्रोग्राम बनाएं, फोन में ट्रेनर या जिम बडी के साथ रिमाइंडर सेट करें। प्लान के अनुसार वर्कआउट करने पर खुद को छोटे-छोटे रिवॉर्ड दें। ताकि जब भी हम रुटीन तोड़ें तो हमें अहसास हो, साथ ही हम उसकी भरपाई में जुट जाएं।

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