कोरोना ने वर्चुअल दुनिया के सामने एक अजीब स्थिति पैदा कर दी है। लाखों लोग इस महामारी में जान गंवा चुके हैं, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी प्रोफाइल मौजूद है। मौत के बाद उनके अकाउंट का जिम्मा संभालने या बंद करने के इंतजाम तो हैं, लेकिन यह काम उतना आसान नहीं है। किसी मृतक के ट्विटर या फेसबुक प्रोफाइल को स्मृति अकाउंट (मेमोरियल अकाउंट) में बदला जा सकता है।
फेसबुक की पॉलिसि के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति ने अपनी सेटिंग में विरासत वाला संपर्क दिया है, तो वह उस अकाउंट को संचालित कर सकता है। अब यह बहस तेज हो गई है कि मृतकों की वर्चुअल विरासत का मालिक कौन हो और उनके डेटा को कैसे सुरक्षित रखा जाए।
विधेयक को अंतिम रूप दिया जाना बाकी
डेटा संरक्षण बिल की बहस में शामिल एक सांसद ने बताया कि इस मुद्दे पर कमेटी में कई बार चर्चा हुई थी, लेकिन विधेयक को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। डेटा संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विराग गुप्ता ने सवाल किया कि जब सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाते समय KYC नहीं मांगा जाता, तो हटाने के लिए इस तरह के प्रमाण की जरूरत क्यों है?
अकाउंट बंद करने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र व वसीयत जैसे दस्तावेज चाहिए
- ट्विटर अकाउंट हटाने के अनुरोध करने के बाद बाद ईमेल मिलेगा, जिसमें पहचान पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र की कॉपी और अन्य जानकारियां मांगी जाएंगी। इसकी समीक्षा के बाद अकाउंट डिलीट होगा।
- फेसबुक से अकाउंट हटाने के लिए इनमें से एक दस्तावेज चाहिए। मृत्यु प्रमाण पत्र की स्कैन कॉपी या पावर ऑफ एटॉर्नी या जन्म प्रमाण पत्र आखिरी वसीयत या टेस्टामेंट, अटेस्टेट लैटर।
ये संभाल रहे मेमोरियल अकाउंट
- टीवी एंकर रोहित सरदाना के सोशल अकाउंट उनका परिवार संभाल रहा है। इन बारीकियों को समझने वाली उनकी पत्नी प्रमिला ने तुरंत पति की वर्चुअल विरासत को संभाल लिया।
- पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ट्विटर हैंडल बेटी बांसुरी संभालती हैं और इसे लगातार अपडेट भी करती हैं। इस पर साफ इंगित है कि यह मेमोरियल अकाउंट है।
