आर्थिक तंगी से जूझ रहा इंदौर नगर निगम अपनी आय बढ़ाने और शहर के विकास को गति देने की कवायद में जुटा है, लेकिन पहले जहां कोरोना ने निगम की कवायद पर पानी फेर दिया था, वही अब निगम कर्मचारियों की सुस्ती निगम को भारी पड़ रही है। आलम यह है कि हर वर्ष अपने टारगेट को बढ़ाने वाला इंदौर नगर निगम अपने बीते वर्ष के राजस्व वसूली के टारगेट को भी पूरा कर पाने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है, जबकि इंदौर में नए करदाता लगातार बढ़ते ही जा रहे है।
दरअसल इंदौर नगर निगम इस वर्ष अब तक कुल 404 करोड रुपए का राजस्व ही वसूल कर पाया है, जबकि निगम ने बीते वर्ष 555 करोड रुपए का राजस्व वसूला था। पहले जब इंदौर का विस्तार इतना ज्यादा नहीं था और 29 गांव इंदौर में शामिल नहीं हुए थे तब निगम लगभग 300 करोड रुपए का टारगेट राजस्व वसूली का रखता था, लेकिन जब से इंदौर का विस्तार हुआ है तबसे राजस्व वसूली की राशि वर्ष दर वर्ष बढ़ती जा रही है और नए करदाताओं को जोड़कर निगम अपने टारगेट को बढ़ाता भी जा रहा है। पिछले वर्ष निगम 555 करोड रुपए सालाना वसूली का टारगेट ले चुका था, जिसे इस बार लगभग साढे छह सौ करोड से अधिक किया जाना संभावित था, लेकिन कोरोना महामारी ने निगम के इस टारगेट को रोक दिया। अब हालात यह है कि निगम बीते वर्ष का 555 करोड रुपए का टारगेट भी नहीं वसूल पा रहा है। निगम के अधिकारी भी मान रहे हैं कि निगम इस वर्ष 555 करोड रुपए के आंकड़े को हासिल नहीं कर पाएगा, क्योंकि निगम अभी इस आंकड़े से लगभग डेढ़ सौ करोड रुपए पीछे है। वित्तीय वर्ष के अंत तक यदि निगम कड़ी कवायद करेगा, तब भी निगम इस आंकड़े से पीछे ही रहेगा। गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में कटौती के बाद निगम ने तय किया था कि निगम अपनी राजस्व वसूली को बढ़ाकर और अन्य साधनों से अपनी आय को बढ़ाएगा ताकि शहर के विकास को गति मिल सके, लेकिन देखना होगा कि अब निगम इस स्थिति में शहर के विकास की गति को कितना आगे बढ़ा पाता है।
एस कृष्ण चैतन्य, अपर आयुक्त, नगर निगम
