छह दिन बाद पकड़ाया चिड़ियाघर से भागा तेंदुआ, वन विभाग के दफ्तर के पास मिला

By Abhishek Raghuvanshi
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एक कहावत आप सभी से सुनी होगी की बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा, लेकिन इस बार बगल में कोई छोरा नहीं बल्कि तेंदुआ था, जिसे वन विभाग पुरे शहर में ढूंढ रहा था और आज पिछले 5 दिनों से जारी सर्चिंग अभियान के बाद तेंदुआ अचानक से वन विभाग दफ्तर के परिसर में मिला, जिसे कई दिनों से वन विभाग ज़ू परिसर में ढोल ताशों के साथ ढूंढ रहा था।

पूरा मामला 1 दिसंबर की रात का है जब बुरहानपुर के नेपानगर से वन विभाग की टीम एक घायल तेंदुए को इलाज के लिए इंदौर के ज़ू लेकर पहुंची थी, लेकिन रात काफी हो जाने और पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण ज़ू प्रभारी डॉ उत्तम यादव ने इस तेंदुए की कस्टडी लेने के मना करते हुए इसे सुबह लाने की बात कही थी, लेकिन वन विभाग के कहने पर ज़ू प्रभारी ने उहने एक रात ज़ू में ही बिताने की अनुमति दे दी थी, लेकिन जब 2 दिसंबर की सुबह जब ज़ू प्रभारी, वन विभाग के टीम के साथ तेंदुए की कस्टडी लेने पहुंचे, तो उन्हें पिंजरा तो मिला, लेकिन उस पिंजरे में तेंदुआ नहीं मिला। जिसके बाद वन विभाग और ज़ू प्रभारी के पसीने छूट गए के आखिर तेंदुआ गया तो गया कहा।

गायब होने की जानकारी लगते हुए वन विभाग और ज़ू प्रशासन हरकत में आया और ज़ू परिसर में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी गई, वही सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल को खली करवाकर ज़ू को बंद कर दिया गया। जिसमे ढोल ताशो के साथ ही तमान उपाए इस तेंदुए को पकड़ने के किये गए, लेकिन 5 दिन और 5 रातों की मशक्क्त के बाद भी तेंदुआ ज़ू में नहीं मिला।

वही आज अचानक भगवान की कृपा वन विभाग पर हुई और उनके कर्मचारी को अपने ही दफ्तर के पास यह तेंदुआ दिखा, जिसके बाद उसके द्वारा वरिष्ठ अधिकारीयों को सुचना दी गई। और फिर विभाग के अधिकारी ज़ू की टीम को लेकर मौके पर पहुंचे और उस तेंदुए को पकड़ने की कोशिशे करने लगे। डेढ़ घंटे की कोशिश और कई उपकरणों की सहायता से आख़िरकार दोनों विभाग के संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उस तेंदुए को जाल की सहायता से पकड़ा, जिसके बाद उसे इंजेक्शन के सहायता से काबू लाया गया और ज़ू की टीम इस तेंदुए को लेकर वन विभाग से रवाना हो गई, जहाँ उसका प्राथमिक उपचार शुरू हुआ।

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