किसी भी प्रोडक्ट को ऑनलाइन खरीदने के लिए उपभोक्ता सबसे अधिक भरोसा उस प्रोडक्ट की रेटिंग और रिव्यू पर करते हैं। लेकिन, दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से रेटिंग और रिव्यू के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। देश की दो सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट और अमेजन पर कई विक्रेता खरीदारों पर प्रोडक्ट को 5 स्टार रेटिंग देने का दबाव बना रहे हैं।
अमेजन से वेट मशीन खरीदने वाले वेरिफाइड कस्टमर विश्वास शाह कहते हैं- प्रोडक्ट खरीदने के बाद विक्रेता की ओर से कॉल आया कि आप हमें अमेजन पर 5 स्टार रेटिंग दीजिए, इसके बाद आपको वारंटी ईमेल कर देंगे। इसी तरह, फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करने वाले सूरत के एक व्यक्ति ने बताया कि उन्हें प्रोडक्ट खरीदने के बाद 5 स्टार रेटिंग देने पर 6 महीने अतिरिक्त वारंटी का लालच दिया गया।
उन्होंने कहा कि सामान्य सा प्रोडक्ट होने के बाद भी उसकी रेटिंग काफी हाई थी, इसका मतलब है कि विक्रेता ने इसी तरह हाई रेटिंग हासिल की है। उपभोक्ता अधिकार संगठन ‘कंज्यूमर वॉइस’ के चीफ ऑपरेटिंग अफसर असीम सान्याल कहते हैं- विकसित देशों में फेक रिव्यू-रेटिंग के खिलाफ कानून हैं, पर भारत में नहीं है। इसका फायदा ई-कॉमर्स कंपनियाें के जरिए सामान बेचने वाले विक्रेता उठाते हैं।
अमेजन इंडिया के प्रवक्ता ने बताया- ‘हमारी टीम फर्जी रिव्यू-रेटिंग का पता लगाने और उन्हें रोकने का काम करती है। 2020 में हमने 20 करोड़ से अधिक संदिग्ध फेक रिव्यू हटाए। इनमें से 99% से अधिक फेक रिव्यू हमने खुद खोजे थे। फ्लिपकार्ट ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
फर्जी रिव्यू के खिलाफ कानून नहीं, इसी का फायदा उठा रहे विक्रेता
ब्रिटिश नियामक ‘कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरिटी’ (सीएमए) ने इसी साल जून में अमेजन और गूगल के खिलाफ जांच शुरू की है। आरोप है कि अमेजन और गूगल ने नकली रिव्यू की समस्या सुलझाने के प्रयास नहीं किए, जो कि ब्रिटेन में कानून का उल्लंघन है। सीएमए के सीईओ एंड्रिया कोसेली ने जांच शुरू करते वक्त कहा था कि फर्जी रिव्यू पढ़कर ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोग भ्रमित होते हैं। अगर कुछ कारोबारी 5 स्टार रिव्यू की बदौलत प्रोडक्ट्स और सेवाओं को उम्दा बताकर उनकी ज्यादा बिक्री करने में सफल हो जाते हैं, तो कानून के जरिए उन्हें ऐसा करने से रोका जाना चाहिए।
