कोविड 19 : क्या है जूम? बढ़ रहा है इस्तेमाल, लेकिन कितना सुरक्षित है?

By Abhishek Raghuvanshi
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वर्क फ्रॉम होम के चलन के कारण बढ़ रहा है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्स का इस्तेमाल. फाइल फोटो.

कोविड 19 के दौर में कई एप्स को पीछे छोड़ते हुए ज़ूम एप ने लोकप्रियता के शिखर पर अचानक पहुंचने का कीर्तिमान तो बना लिया है लेकिन साथ ही इस एप की टीम की मुसीबतें भी बढ़ गई हैं. एक तरफ, इस एप पर डेटा बेचने के आरोप हैं तो दूसरी तरफ हैकिंग तक की समस्याएं भी. जानें क्यों और कैसे आपको यह एप इस्तेमाल करना चाहिए.

एक तरफ दुनिया में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ ज़ूम का इस्तेमाल भी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्लीकेशन ज़ूम के इस्तेमाल में उछाल का सबसे बड़ कारण दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन या आइसोलेशन की स्थिति का बनना है. लेकिन, क्यों ज़ूम सवालों के घेरे में आ गया है? यह कितना सुरक्षित है और क्या इससे आपकी डेटा सिक्योरिटी प्रभावित होती है?

दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के चलते वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है. ऐसे में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कई तरह की मीटिंग्स और काम हो रहे हैं. इस ज़रूरत के चलते फि ज़ूम एप चर्चा में आ गया है क्योंकि एक तो यह सबसे लोकप्रिय एप बनकर उभरा है, वहीं इससे जुड़े कई सवाल खड़े हो गए हैं. इससे पहले कि आप भी इस एप का इस्तेमाल करें, पूरा ब्योरा विस्तार से समझने की ज़रूरत है.

क्या चीन के पास है एप की चाबी?
अमेरिका के कैलिफोर्निया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप ज़ूम का मुख्यालय ज़रूर है, लेकिन इसका ज़्यादातर टेक्निकल काम चीन में हुआ है. फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट में रणनीतिक अध्ययन केंद्र के फेलो जैकब हेलबर्ग के हवाले से कहा गया है कि ज़ूम की बड़ी इंजीनियरिंग टीम चीन बेस्ड है. हेलबर्ग ने यह भी कहा है कि इस एप पर संवेदनशील सूचनाओं का आदान प्रदान करना जोखिम भरा साबित हो सकता है क्योंकि इस एप का डेटा कलेक्शन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कर रही हो, ऐसा मुमकिन है.ज़ूम का दावा ‘कोई खतरा नहीं’
इस तरह के बयानों और सवालों के चलते कठघरे में आए ज़ूम ने दावा किया है कि यह एप सुरक्षा के कई अवसर देता है और यूज़रों के डेटा की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर कई कदम उठाता है. ज़ूम ने बीबीसी के साथ बातचीत में यह भी कहा कि यूनाइटेड किंगडम के रक्षा विभाग समेत कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और सरकारी व गैर सरकारी इकाइयां इस एप का इस्तेमाल करती हैं या इस एप के साथ किसी​ किस्म की डील से जुड़ी हैं. उपभोक्ताओं को खतरा महसूस करने की ज़रूरत नहीं है.

वीडियो संबंधी कई एप्स को पछाड़ते हुए ​हाल में, ज़ूम अव्वल एप बनने में कामयाब हुआ.

क्यों आई इस सफाई की नौबत?
ज़ूम के सामने अपनी सफ़ाई पेश करने की नौबत इसलिए भी आई क्योंकि इस एप के खिलाफ़ हाल में एक मुकदमा और दावा ठोका गया है. सीबीएस न्यूज़ की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क के टॉप अभियोजन ज़ूम के सुरक्षात्मक कदमों की कड़ी जांच कर रहे हैं. इस जांच का कारण यह है कि कैलिफोर्निया में ज़ूम के खिलाफ एक दावा कर आरोप लगाया गया कि ज़ूम ने यूज़रों की इजाज़त के बगैर उनका पर्सनल डेटा को फेसबुक समेत कई बाहरी कंपनियों को बेच दिया.

क्यों है सुरक्षा को लेकर सवाल?
पहले भी इस एप से जुड़े सुरक्षात्मक उपायों को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं. याहू की खबर की मानें तो जब पिछले हफ्ते यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने जब ट्वीट कर बताया था कि कैसे उन्होंने ज़ूम पर एक कैबिनेट मीटिंग की, तब भी एप की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे.

हैकिंग से भी रहें सतर्क
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बढ़ते दौर में हैकिंग भी एक खतरा बनकर उभरी है. फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट कहती है कि एफबीआई ने कथित ‘ज़ूम बॉम्बिंग’ को लेकर सतर्क किया था, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हैकिंग से जुड़ा मुद्दा था. एफबीआई ने दावा किया था कि उसके पास ऐसी कई शिकायतें आईं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कोई अनजान व्यक्ति कॉन्फ्रेंस में जुड़ गया या किसी अनजान व्यक्ति ने पॉर्न या हेट तस्वीरों या भाषा के ज़रिए कॉन्फ्रेंस को बाधित करने की कोशिश की.

अब भी लोकप्रिय है ज़ूम
इस पूरे ब्योरे के बाद दो बातें साफ हैं कि ज़ूम किस तरह यूज़रों के डेटा की सुरक्षा को तवज्जो देता है, इसके खिलाफ सघन जांच चल रही है और दूसरी तरफ ज़ूम का दावा है कि उसने डेटा से कोई समझौता नहीं किया है. इसके बीच, याहू की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक महामारी के समय बने हालात के चलते ज़ूम को यूके में एप रैंकिंग में दूसरा सबसे लोकप्रिय एप और यूएस में पहला घोषित किया गया है.

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First published: April 2, 2020, 4:42 PM IST

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