COVID-19 से हुई मौत के बाद शव को कब्रिस्तान में दफनाने का लोगों ने किया विरोध

By Abhishek Raghuvanshi
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गुजरात में कोरोना पीड़ित एक महिला को कब्रिस्तान में दफनाए जाने का स्थानीय लोगों ने किया विरोध (सांकेतिक फोटो)

पुलिस ने रविवार को बताया कि स्थानीय लोगों (Local People) द्वारा विरोध किए जाने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी (Police and Health Officers) शव को दूसरे कब्रिस्तान (Cemetery) में ले गए जहां उसे दफनाया गया.

अहमदाबाद. अहमदाबाद (Ahmedabad) में कोरोना वायरस (Coronavirus) से एक महिला की मौत होने के बाद जब उसके शव को घर के पास स्थित कब्रिस्तान (Cemetery) में दफनाने (For Burial) ले जाया गया तो कई स्थानीय लोगों (Local People) ने इसका विरोध किया और आशंका जताई कि इससे संक्रमण (infection) फैलने का खतरा है.

पुलिस ने रविवार को बताया कि स्थानीय लोगों (Local People) द्वारा विरोध किए जाने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारी (Police and Health Officers) शव को दूसरे कब्रिस्तान (Cemetery) में ले गए जहां उसे दफनाया गया.

कब्रिस्तान में लोगों ने नहीं दफनाने दिया शव
कोविड-19 की मरीज महिला 46 वर्ष की थी और यहां स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल (Sardar Vallabhbhai Patel Hospital) में शनिवार को उसकी मौत हो गयी थी. इसके बाद उसी दिन शाम को उसके शव को कागड़ापीठ में उसके घर के पास स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया था.एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कब्रिस्तान में स्थानीय लोग एकत्रित हो गए और शव को दफनाने का विरोध करने लगे.

दूसरे कब्रिस्तान ले जाया गया शव तो वहां भी हुआ विरोध
उनका कहना था कि शव को उस कब्रिस्तान में दफनाने से कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) फैलने का खतरा है. लोगों द्वारा विरोध करने के बाद शव को दानिलिमड़ा क्षेत्र में स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया. वहां भी स्थानीय लोगों ने शव को दफनाने का विरोध किया.

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों (Local People) को समझाने का प्रयास किया कि शव को चिकित्सकीय नियम के अनुसार पूरी तरह साफ किया गया है और संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है.

अधिकारियों से समझाने के बाद माने लोग और मिली शव दफनाने की अनुमति
अधिकारियों (officers) द्वारा समझाने बुझाने के बाद लोग मान गए और शव को दफनाने की अनुमति दे दी.

इस बीच कोरोना वायरस फैलने के खतरे को कम करने के इरादे से गुजरात सरकार (Gujarat Government) ने रविवार को 1,200 कैदियों को दो महीने के लिए पैरोल और अंतरिम जमानत पर छोड़ने का निर्णय लिया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

गृह विभाग बनाएगा उन कैदियों की सूची, जिन्हें 2 महीने के लिए छोड़ा जा सके
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य के गृह विभाग को ऐसे कैदियों की सूची बनाने को कहा गया है जिन्हें दो महीने के लिए छोड़ा जा सके.

इन कैदियों को स्थानीय अदालतों के न्यायाधीशों की मदद से पैरोल और अंतरिम जमानत दी जाएगी.

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First published: March 29, 2020, 9:11 PM IST

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