Covid 19: गंगा के बाद अब यमुना का पानी भी दिखने लगा साफ, NGT ने मांगी रिपोर्ट

By Abhishek Raghuvanshi
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नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने इस संबंध में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है. (फाइल फोटो)

कारखानों के बंद हो जाने के चलते यमुना में गिरने वाला गंदा पानी नहीं आने के चलते नदी का पानी खुद ही साफ हो गया है. विशेषज्ञों का ध्यान अब इस ओर है और नदी के खुद के स्तर पर ही साफ हो जाने को लेकर इसे भविष्य के मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है.

नई दिल्ली. कोरोना (Corona) संक्रमण के चलते देशभर में हुए लॉकडाउन का सकारात्मक असर नदियों पर दिखना शुरू हो गया है. गंगा के पानी के कुछ साफ होने के बाद अब खबर है कि यमुना भी दिल्ली में साफ दिखाई दे रही है. कारखानों के बंद हो जाने के चलते यमुना (Yamuna River) में गिरने वाला गंदा पानी नहीं आने के चलते नदी का पानी खुद ही साफ हो गया है. विशेषज्ञों का ध्यान अब इस ओर है और नदी के खुद के स्तर पर ही साफ हो जाने को लेकर इसे भविष्य के मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि पिछले कई दशकों से केंद्र और राज्य सरकार दिल्ली में यमुना को साफ करने के कई प्रयास कर चुकी है लेकिन कभी भी सफलता नहीं मिली है.

एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट
वहीं नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने इस संबंध में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है. एनजीटी की ओर से गठित यमुना मॉनिट्र‌िंग कमेटी ने एसपीसीबी और डीपीसीसी से पूछा है कि लॉकडाउन के चलते यमुना के पानी की गुणवत्ता पर कितना असर हुआ है. इसके साथ ही निर्देश दिया गया है कि ये रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर दी जाए.

50 फीसदी तक साफ हुई गंगा
वहीं दशकों से हो रही गंगा को साफ करने की कवायद तो कभी रंग नहीं ला सकी लेकिन लॉकडाउन के दौरान गंगा का पानी अब काफी साफ नजर आ रहा है. जानकारी के अनुसार कानपुर और वाराणसी में 40 से 50 फीसदी पानी साफ हो गया है. लॉकडाउन की वजह से कानपुर में बंद पड़े उद्योगों की वजह से गंगा के जल की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉक्‍टर पीके मिश्रा के मुताबिक, वाराणसी और कानपुर में गंगा के पानी में 40-50 फ़ीसदी तक सुधार देखने को मिला है. एएनआई से बातचीत में आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ पीके मिश्रा ने कहा, ‘गंगा में अधिकतर प्रदूषण कंपनियों की वजह से होता है और लॉकडाउन की वजह से उनके बंद होने के कारण यह महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है.’

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First published: April 6, 2020, 9:17 AM IST

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