14 अप्रैल से आगे बढ़ा लॉकडाउन तो LPG सिलेंडर की डिलीवरी पर होगा ये असर

By Abhishek Raghuvanshi
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एलपीजी सिलेंडर के लिए परेशान न हों.

इस दौरान रसोई गैस सिलेंडर की मांग में उछाल आया है. इस पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि अगर देश में लॉकडाउन 3 हफ्ते से आगे बढ़ा भी तो एलपीजी सिलेंडर के लिए परेशान न हों.

नई दिल्ली. देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लगाया गया है. जिसकी वजह से लोगों ने सामान इकठा करना शुरू कर दिया है. इस दौरान रसोई गैस सिलेंडर की मांग में उछाल आया है. इस पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि अगर देश में लॉकडाउन 3 हफ्ते से आगे बढ़ा भी तो एलपीजी सिलेंडर के लिए परेशान न हों. आपके घर तक रसोई गैस की डिलीवरी निर्बाध जारी रहेगी.

सिलेंडर की रिफिल बुकिंग में 200 फीसद का इजाफा हुआ
दरअसल लॉकडाउन की घोषणा के बाद जहां पेट्रोल, डीजल की मांग में कमी आई है वहीं एलपीजी सिलेंडर की रिफिल बुकिंग में 200 फीसदी का इजाफा हुआ है. इंडियन ऑयल कारपोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से आगे बढ़ने के लिए स्टॉक में पर्याप्त पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) हैं.

ये भी पढ़ें: COVID-19: अब EPF अकाउंट से निकाल सकते हैं इतनी रकम, सरकार ने बदला नियममांग बढ़ने डिलिवरी कर्मियों पर बोझ बढ़ता है: सिंह
उन्होंने कहा कि ग्राहक घबराहट में अनावश्यक रूप से गैस सिलेंडर की बुकिंग शुरू कर देते हैं तो व्यवस्था पर दबाव पड़ता है. बुकिंग बढ़ने पर गैस सिलेंडर भरने के कारखानों को सूचना तत्काल दे दी जाती है और वे सिलेंडर भरने का काम तेज कर देते हैं. वहां से सिलेंडर वितरकों को जाता है और वितरक अपने डिलिवरी कर्मचारियों के जरिए घर-घर सिलेंडर पहुंचाते हैं. यदि मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो पहले से दबाव में काम करने वाले वितरकों ओर डिलिवरी कर्मियों पर भी बोझ बढ़ जाता है.

मार्च में पेट्रोल की मांग 8% रह गयी
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण आवाजाही पर देशव्यापी पाबंदी के चलते वहनों और विमानों आदि का परिचालन प्रभावित होने से डीजल पेट्रोल और विमान ईंधन की मांग घट गई है. मार्च में पेट्रोल की मांग 8% और डीजल की मांग 16% घट गई है. इसी तरह विमान ईंधन की मांग में भी 20% की गिरावट दर्ज की गई है.

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सिंह ने कहा कि हल्की मांग कम होने से तेल शोधन संयंत्रों ने डीजल और पेट्रोल का उत्पादन 25 से 30% घटा दिया है. तेलशोधक कारखानों में कच्चे तेल के प्रसंस्करण से एक अनुपात में पेट्रोल, डीजल, मिट्टी तेल और विमान ईंधन तथा एलपीजी का उत्पादन होता है. यदि कच्चे तेल की प्रोसेसिंग कम होती है तो इन सभी सभी ईंधनों के उत्पादन में उसी अनुपात में कमी आती है.

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First published: March 30, 2020, 9:22 AM IST

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