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लॉकडाउन के कारण दो जून की रोटी के लिए मोहताज हुआ समलैंगिक समुदाय, कहा-अब क्या?

समलैंगिक समुदाय के एक बड़े हिस्से का गुजारा भीख मांगकर चलता है एक समलैंगिक ने कहा, 'हमें एक समय के भोजन का इंतजाम करने में भी दिक्कतें हो रही हैं.

Abhishek Raghuvanshi30 मार्च 2020 · 1 मिनट पढ़ें
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लॉकडाउन के कारण दो जून की रोटी के लिए मोहताज हुआ समलैंगिक समुदाय, कहा- अब क्या...

समलैंगिक समुदाय के एक बड़े हिस्से का गुजारा भीख मांगकर चलता है

एक समलैंगिक ने कहा, ‘हमें एक समय के भोजन का इंतजाम करने में भी दिक्कतें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान के हालातों में कई भी उनकी मदद के लिए आगे हाथ नहीं बढ़ा रहा है.

लॉकडाउन के कारण देश के सभी शहरों में देश की जनता का घर से बाहर निकलना मना है. चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है ताकि लोगों को किसी तरह की समस्या न आए. लॉकडाउन के कारण एक तरफ देश के कई हिस्सों से मजदूर अपने-अपने गांव की ओर पैदल पलायन कर चुके हैं. वहीं, दूसरी तरफ कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के चलते बेंगलुरू में हाशिये पर खड़ा समलैंगिक समुदाय बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी मुश्किलों का सामना कर रहा है.

समलैंगिक समुदाय के एक बड़े हिस्से का गुजारा भीख मांगकर चलता है, लेकिन लोगों के सड़कों से नदारद होने और दुकान बंद होने से समुदाय के अधिकतर लोगों के पास पैसा नहीं बचा है. एक समलैंगिक ने कहा, ‘हमें एक समय के भोजन का इंतजाम करने में भी दिक्कतें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान के हालातों में कई भी उनकी मदद के लिए आगे हाथ नहीं बढ़ा रहा है.

समझ नहीं आ रहा है क्या करें ?

जब उनसे कहा गया कि सरकार मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों की मदद कर रही है तो एक अन्य समलैंगिक ने कहा, ‘हमारी गलती क्या है? हालात यह हैं कि हम बाहर जाकर पैसा या खाना भी नहीं मांग सकते. कम से कम हमें खाना तो मुहैया कराया जाए.’एक समलैंगिक ने कहा कि हम में से कुछ के पास को दवा खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं. जिन लोगों के साथ वो रहते हैं उनमें कई बुजुर्ग शामिल हैं, जो कि बीमारी है. वहीं, कुछ लोग एचआईवी संक्रमित हैं, जिन्हें दवा की आवश्यकता है.

संगठन ने किया ये दावा

लाइहालांकि समलैंगिकों के अधिकारों के लिये काम कर रहे ‘ओनडेडे’ जैसे संगठन समुदाय के शुभचिंतकों के साथ मिलकर उन्हें घर पर ही किराने का सामान मुहैया करा रहे हैं. ओनडेडे की प्रमुख अक्काई पद्मशाली की मांग है कि जबतक हालात ठीक नहीं हो जाते तब तक सरकार को समलैंगिक समुदाय और अन्य संवेदनशील तबकों की मदद करने चाहिये ताकि वे एक-दो महीने तक अपना गुजारा कर सकें.

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First published: March 30, 2020, 3:15 PM IST

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