इंदौर से क्षिप्रा जा रहा मजदुर का परिवार एक बैलगाड़ी और उस पर लदा सामान जिसे खीचते हुए दो मजदुर….यह द्रश्य देखकर हर किसी को विचलित होना लाजमी हे . दो बच्चे बीमारी की चपेट में आने से इनके इलाज के लिए अपने दोनों बैल बेच दिए . अब उन बच्चों के अस्थि कलश लेकर शिप्रा नदी में विसर्जित करने जा रहा यह परिवार, बुधवार को सांवेर शिप्रा मार्ग पर हतुनिया के समीप एक बैलगाड़ी लेकर मजदुर अपने परिवार सहित जा रहे थे . बैलगाड़ी में आगे बैल नहीं थे बल्कि बैलों की जगह मजदुर अपना कन्धा लगाकर बैलगाड़ी चला रहे थे .इस पप्रतिनिधि ने इस परिवार से बात की तो बड़े लड़के सुनील ने बताया की वह उज्जैन के पास निनोरा गाँव से अ रहा हे और अब क्षिप्रा जा रहा है . 18 हजार में बेचे दोनों बैल , सुनील ने बताया की उसके दो भाई बहन की किडनी ख़राब हो गई थी उसके बाद उसने उनका बहुत इलाज करवाया लेकिन वह बच नहीं सके. उसके बाद उसने अपने दोनों बैलों को 18 हजार में बैच दिया और भाई बहन का अंतिम संस्कार किया और अपनी बहन को अस्तिया विसर्जित लड़ने शिप्रा नदी पर जा रहे है और फिर वही रुकेंगे,जब इनसे पूछा रास्ते मे क्यों नही कही रुके तो इस परिवार का कहना था रास्ते मे कोई रुकने नही देता और लॉक डाउन हुआ है कोई काम भी नही बचा है,किसी गाँव मे काम मांगने जाते है तो मना कर देते है क्योंकि बीमारी चल रही है ,अब उसके पास कोई बैल नहीं है इसलिए वह बैलगाड़ी में बैलों की जगह दोनों भाई ही कंधे लगाकर बैलगाड़ी को चला रहे हे। सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद अब प्रशासन जा गया है वही मंत्री तुलसी सिलावट ने इसको बड़ी दुखद निंदनीय घटना बताते हुए परिजनों की मदद करने की बात की है वही प्रशासन को ऐसे मामलों में पहले ही हिदायत दी गई थी कि किसी भी प्रकार की परेशानी मजदूर वर्ग को ना हो इस पर जिस किसी की भी लापरवाही दिखेगी उस पर कार्यवाही भी की जाएगी अब देखना यह होगा कि किस पर प्रशासन कार्यवाही करता है और कितनी मदद इस परिवार को मिलती है।
